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	<title>UPDD Web &#8211; UP Digital Diary</title>
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	<description>Hindi News &#38; Views</description>
	<lastBuildDate>Fri, 26 Jun 2026 08:27:32 +0000</lastBuildDate>
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	<title>UPDD Web &#8211; UP Digital Diary</title>
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		<title>दुनियाभर में घटी ट्रंप की लोकप्रियता</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101983</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:27:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रेटिंग पर उनकी टैरिफ समेत तमाम नीतियों और ईरान युद्ध का गहरा असर पड़ा है। उनकी न केवल दुनियाभर में लेाकप्रियता घटी है बल्कि विश्व मामलों के संभालने को लेकर उनकी नीतियों पर दुनिया का भरोसा कम हुआ है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के अनुसार, &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रेटिंग पर उनकी टैरिफ समेत तमाम नीतियों और ईरान युद्ध का गहरा असर पड़ा है। उनकी न केवल दुनियाभर में लेाकप्रियता घटी है बल्कि विश्व मामलों के संभालने को लेकर उनकी नीतियों पर दुनिया का भरोसा कम हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के अनुसार, दुनियाभर में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में भारी कमी आई है और 76 प्रतिशत लोगों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं जताया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ट्रंप की लोकप्रियता घटी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मंगलवार को जारी सर्वे नतीजों के अनुसार, केवल 23 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वैश्विक मामलों के समाधान में ट्रंप के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। जबकि 24 देशों में से 16 में उनके प्रति विश्वास में कमी आई है और किसी भी देश में इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आठ फरवरी से 13 मई तक किए गए इस सर्वे में 36 देशों के 42,151 लोगों ने हिस्सा लिया। जहां तक भारत की बात है तो यहां 39 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ट्रंप के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया है, जबकि 36 प्रतिशत ने भरोसा नहीं जताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले साल भारत में 51 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा जताया था। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 51 प्रतिशत भारतीयों ने वैश्विक मामलों को संभालने में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर विश्वास जताया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इजरायल में 81 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अमेरिका के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया और 66 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें यकीन है कि ट्रंप वैश्विक मामलों में सही कदम उठाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तीन यूरोपीय देशों फ्रांस, जर्मनी और ग्रीस में भी ट्रंप की रेटिंग में गिरावट आई है। मुस्लिम बहुल देशों में भी अन्य नेताओं की तुलना में ट्रंप की लोकप्रियता में काफी गिरावट आई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">टैरिफ नीति नहीं आई पसंद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सर्वे के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति सबसे कम पसंद की जाने वाली नीतियों में एक थी, जिसे केवल 18 प्रतिशत ने ही सही माना, जबकि 32 प्रतिशत ने अमेरिका की आव्रजन नीति को अच्छा बताया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप की टैरिफ नीति को व्यापक रूप से अलोकप्रिय माना गया है। इस नीति को ब्रिटेन में 27 प्रतिशत, कनाडा में 17 प्रतिशत, जापान में 15 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया में 14, मेक्सिको में 11 प्रतिशत और जर्मनी में केवल आठ प्रतिशत मंजूरी मिली है। इस मामले में केवल केन्या ही ऐसा देश रहा, जहां 55 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के टैरिफ का समर्थन किया है।</p>
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		<item>
		<title>होर्मुज में फिर बढ़ी टेंशन: ओमान ने तेल टैंकरों के लिए खोला नया रूट</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101980</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:22:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद कई जहाज इस रास्ते से गुजरने लगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी बीच, गुरुवार को इस नए रूट से गुजर रहे एक जहाज पर मिसाइल से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने पुष्टि की है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ओमान का टोल-फ्री कॉरिडोर</h2>



<p class="wp-block-paragraph">ओमान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन(आईएमओ) के समर्थन से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर उपलब्ध कराया है। इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें जहाजों से किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क या टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान लंबे समय से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने के बदले शुल्क वसूलने की वकालत कर रहा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स(आईआरजीसी) ने ओमान के इस नए मार्ग को पूरी तरह अवैध करार दिया है। आईआरजीसी का स्पष्ट कहना है कि होर्मुज में केवल वे ही मार्ग मान्य होंगे जिन्हें तेहरान ने निर्धारित किया है, और इन रास्तों से बाहर जाने वाले जहाजों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टोल टैक्स पर अमेरिका का सख्त रुख</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने ईरान द्वारा टोल वसूलने के किसी भी संभावित प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात शामिल होती है, तो यह अमेरिका को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा और यह गेम चेंजर साबित होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी बीच, बहरीन में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक में पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान यहां टोल लगाता है, तो इसका असर दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्गों पर भी पड़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा, ट्रंप ने ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में अमेरिका का हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि वहां कई मिसाइलें दागी गई थीं और यह स्पष्ट नहीं है कि वे मिसाइलें किसने दागी थीं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी सीनेट में ट्रंप की जीत</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इन अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीति में एक बड़ी राहत मिली है। ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में 24 घंटे के भीतर ही गिर गया। मतदान से पहले ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ बैठक कर नाराजगी जताई थी। इस जीत से व्हाइट हाउस को ईरान के साथ बातचीत में एक मजबूत राजनीतिक बढ़त हासिल हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लड़ाई में नाटो देशों के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी निराशा जताई है। उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रुटे से स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के रवैये की आलोचना की। अपनी सैन्य ताकत का दावा करते हुए ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि अमेरिका चाहे तो वह वेनेजुएला को एक घंटे में और ईरान को महज एक हफ्ते के भीतर खत्म कर सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तराखंड और हिमालयी राज्यों में भूकंप के झटके आने से पहले मिलेगा अलर्ट</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101977</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 07:46:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ सेकंड पहले लोगों को अलर्ट कर सकती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अर्ली वार्निंग सिस्टम को और बेहतर बनाने की दिशा में सबसे सफल प्रयास आईआईटी रुड़की ने उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर किया है। दोनों ने मिलकर भूदेव नाम का एक अत्याधुनिक भूकंप पूर्व चेतावनी ऐप विकसित किया है। यह ऐप भूकंप के खतरों से निपटने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा व लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हिमालयी क्षेत्रों में रियल-टाइम मॉनिटरिंग</h2>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने बीते दिसंबर में संसद को बताया था कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम को समर्पित रियल-टाइम भूकंपीय नेटवर्क शुरू किया गया है। इसके साथ ही, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी क्षेत्रीय डेटा का उपयोग करके प्रोटोटाइप ईईडब्ल्यू एल्गोरिदम विकसित और टेस्ट कर रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके जरिए पी-वेव की सटीक पहचान, भूकंप की तीव्रता का तेजी से अनुमान और झटके आने से पहले की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसे काम करता है अर्ली वार्निंग सिस्टम?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">जब भी कोई भूकंप आता है, तो उसमें से पी-वेव्स निकलती हैं। ये तरंगें सबसे तेजी से यात्रा करती हैं और आमतौर पर कम नुकसान पहुंचाती हैं। ईईडब्ल्यू सिस्टम भूकंप के एपिसेंटर के पास इन्हीं शुरुआती पी-वेव्स को पकड़ लेता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद, विनाशकारी तरंगों के पहुंचने से पहले ही दूर स्थित इलाकों में अलर्ट भेज दिया जाता है। इस तकनीक से प्रशासन और आम लोगों को सायरन बजाने या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कुछ बेहद कीमती सेकंड मिल जाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस सिस्टम से मिलने वाला चेतावनी का समय इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि कोई शहर या इलाका भूकंप के केंद्र से कितनी दूर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप भूकंप के केंद्र के बिल्कुल करीब हैं, तो आपको चेतावनी का समय नहीं के बराबर मिलेगा। वहीं, अगर भूकंप का केंद्र सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर है, तो बचाव के लिए कुछ अतिरिक्त और बेहद अहम सेकंड मिल सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत में कहां लगे हैं सेंसर?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में यह सेंसर नेटवर्क मुख्य रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में स्थापित किया गया है। इन सेंसरों को जानबूझकर सक्रिय फॉल्ट जोन के बहुत करीब रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब ये सेंसर पी-वेव्स को डिटेक्ट करते हैं, तो तेज झटके आने से पहले आसपास के शहरों में अलर्ट भेज देता&nbsp; है। दुनिया के अन्य देशों की बात करें तो फिलहाल जापान, ताइवान और अमेरिका के पास सबसे उन्नत भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां मौजूद हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? समझें 14 हजार किमी दूर वेनेजुएला में आए भूकंप से क्या है कनेक्शन</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101974</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 07:30:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंधों के कारण माल ढुलाई कई दिनों या हफ्तों तक धीमी हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वेनेजुएला में यह आपदा ऐसे समय में आई है, जब मिडिल ईस्ट (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में तनाव के कारण भारत तेल आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा था। कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है, जिसके कारण उम्मीद जगी थी कि तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी व्यवधान आखिरकार कम हो जाएगा। लेकिन अब वेनेजुएला में आए तूफान ने भारत के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडीएमई इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज कुणाल खन्ना के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला हाल ही में कच्चे तेल के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला बहुत कम समय में एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन यहां आए भूंकप से हुए नुकसान के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">वेनेजुएला से तेल आयात में आई थी बड़ी बढ़ोतरी</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मिडिल ईस्ट संकट के बीच भरतीय रिफाइनरी कंपनियों ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि की है। अप्रैल और मई के दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी उझाल आया, जिससे वेनेजुएला भारत के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला में आए भूकंप के कारण भले निर्यात टर्मिनल सुरक्षित हैं, लेकिन बिजली गुल होने, सड़क और परिवहन नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने और बंदरगाहों पर आपात प्रतिबंध लगने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वेनेजुएला के प्रमुख कार्गो बंदरगाह ला गुआइरा को आपदा क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इससे शिपिंग और पोर्ट संचालन को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अब लोगों के मन में सवाल यह है कि क्या इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, इसका सीधा जवाब नहीं है। लेकिन इसके कारण जहाजों को माल लोड करने में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। रूट बदलने के कारण डेमरेज शुल्क भी बढ़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शिपिंग में होने वाली देरी के कारण जहाजों का किराया और बीमा मिलकर तेल की लागत बढ़ा सकते हैं। इन अतिरिक्त खर्चों का सीधा असर कारोबारियों, रिफाइनरियों और बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। इसके कारण सीधे तौर पर तो पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ सकते। लेकिन अगर भंकप के कारण उत्पन्न हुआ यह गतिरोध लंबा खींचता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बीमा कंपनियों के लिए भी चुनौती</h2>



<p class="wp-block-paragraph">कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला से आने वाले जहाजों के लिए बीमा पॉलिसियां अब तक मुख्य रूप से भू-राजनीतिक और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं. लेकिन अब भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी जोखिम का बड़ा कारण बन गई हैं। क्योंकि अब इस समुद्री मार्ग का आकलन प्राकृतिक आपदाओं के नजरिए से भी करना होगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर असर</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने भी वेनेजुएला के तेल परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। यदि लंबे समय तक उत्पादन या निर्यात प्रभावित रहता है तो भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर भी असर पड़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पीएम मोदी और वेनेजुएला के बीच बातचीत</h2>



<p class="wp-block-paragraph">हाल ही में पीएम मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत की थी। पीएम मोदी और रोड्रिगेज ने भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के खनन, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की थी। हालांकि, अब भूकंप के कारण इन योजनाओं में बदलाव संभावना दिख रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>निहंगों से विवाद के बाद फैसला: हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए बनेगी SOP</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101971</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 06:54:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों से विवाद के मामले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमकुंड साहिब यात्रा संचालन के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा, यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए सख्ती भी करनी पड़ी तो निकट भविष्य में करेंगे और एसओपी भी बनाएंगे। बृहस्पतिवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों से विवाद के मामले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमकुंड साहिब यात्रा संचालन के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा, यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए सख्ती भी करनी पड़ी तो निकट भविष्य में करेंगे और एसओपी भी बनाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बृहस्पतिवार को जीएमएस रोड स्थित एक होटल में संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, निहंगों के विवाद का एक प्रकरण हुआ था। उसके बाद वार्ता हुई। इस मामले में कानून ने अपना काम किया है। सभी पक्षों से सबसे बात हो गई और सबको बता भी दिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कानून कोई भी हाथ में लेगा तो कानून से बढ़कर कोई नहीं है। इस समय प्रदेश में चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा चल रही है। देश दुनिया से तीर्थयात्री यात्रा पर आ रहे हैं। यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, उसके लिए कही पर हमको सख्ती करनी पड़े तो निकट भविष्य में करेंगे। यात्रा के लिए एसओपी भी बनाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य</strong><br>चारधाम के साथ हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। अब तक हेमकुंड यात्रा के लिए 2.05 लाख से अधिक यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। इसमें 1.42 से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Uttarakhand: मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101968</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 06:48:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जबकि 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। यह कहना है लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का। उन्होंने यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जबकि 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। यह कहना है लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का। उन्होंने यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक में कही।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मंत्री महाराज ने बताया कि सभी जनपद मुख्यालयों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। देहरादून में भी एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे क्रियाशील है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नदियों के जलस्तर और वर्षा के आंकड़े प्रतिदिन प्राप्त किए जा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य में कुल 113 बाढ़ चौकियां 15 जून से पहले स्थापित कर लीं गई हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने पर वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में अपर सचिव विनीत कुमार, महावीर चौहान, अपर सचिव सिंचाई गरिमा रौंकली, लोनिवि के प्रमुख अभियंता रमेश चंद्र शर्मा, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष कुमार आदि मौजूद रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जलाशयों के बांधों पर लगातार रखी जा रही निगरानी</strong><br>मानसून से पूर्व नदियों के संवेदनशील स्थलों पर चैनेलाइजेशन का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। विभिन्न शहरों में जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए जीआईएस आधारित जल निकासी योजना तैयार की गई है। हरिद्वार के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी का कार्य पूरा हो चुका है। सिंचाई विभाग के जलाशयों के बांधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपात स्थिति के लिए बोल्डर, आरबीएम और रेत की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सड़कें बंद होने पर पहले ही लोगों को सूचना देने के निर्देश</strong><br>विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क बंद होने पर लोगों को पहले ही सूचना मिल जाए। इससे यात्री वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। मानसून सीजन को देखते हुए सभी सड़कों के उचित रखरखाव के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने 3946 पैचवर्क के लक्ष्य के मुकाबले 3968 पैचवर्क पूरे किए हैं। हर सीजन में प्रभावित होने वाली 1199 सड़कों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने को कहा गया है।</p>
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		<title>देहरादून में घुसे निहंगों का हंगामा: देर रात तक चलती रही तनातनी</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101965</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 06:26:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के विवाद के बाद बृहस्पतिवार को निहंग सिखों का जत्था कुल्हाल बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में घुस गया। इनमें से कई देर रात देहरादून के धर्मावाला की ओर बढ़ रहे थे, कुछ निहंग तलवारें लहराकर जत्थे का नेतृत्व कर रहे थे, इन्हें रोकने के &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के विवाद के बाद बृहस्पतिवार को निहंग सिखों का जत्था कुल्हाल बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में घुस गया। इनमें से कई देर रात देहरादून के धर्मावाला की ओर बढ़ रहे थे, कुछ निहंग तलवारें लहराकर जत्थे का नेतृत्व कर रहे थे, इन्हें रोकने के लिए पूरे जिले की पुलिस और अन्य फोर्स मौके पर तैनात थी। लेकिन रात एक बजे तक वह प्रेमनगर नहीं पहुंचे थे, उनकी लोकेशन पुलिस को भी नही पता थी। हालांकि अब मिली जानकारी के अनुसार देर रात सभी लोगों को वापस पांवटा&nbsp;साहिब की तरफ़ भेज दिया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंडीगढ़ से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड के लिए कूच कर रहे करीब 200 निहंगों को पुलिस-प्रशासन ने कुल्हाल चेक पोस्ट पर बैरियर लगाकर रोका था। इसके बाद पांवटा साहिब गुरुद्वारे में करीब दो घंटे तक प्रशासन, पुलिस और निहंग सिखों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद कुछ निहंग लौट गए, जबकि 20 से 30 निहंग कुल्हाल पुल पार कर चेकपोस्ट पर पहुंच गए, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, यहां कई घंटे तक तनातनी चलती रही।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद ये निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। मौके पर तैनात पुलिस और आईटीबीपी के सामने ही तलवारें लहराते हुए वह देहरादून-पांवटा राजमार्ग की ओर जाने लगे। इस दौरान उन्हें रोकने के लिए पुलिस की ओर से खड़े किए गए दो डंपरों में भी उन्होंने तोड़फोड़ कर दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">निहंगों के उत्तराखंड की सीमा में घुसने की सूचना पर शासन-प्रशासन ने जिलेेभर से पुलिस और अन्य बलों को मौके के लिए रवाना कर दिया। निहंग हेमकुंड साहिब जाने की बात पर अड़े हुए थे।</p>
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		<title>लखनऊ अग्निकांड : प्रवेश द्वार पर एसी के पांच आउटर यूनिट देख एसआईटी नाराज</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101962</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 05:46:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[अलीगंज अग्निकांड मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बृहस्पतिवार को जलकल जोन-तीन कार्यालय का दौरा किया। इसके बाद टीम घटनास्थल पर भी पहुंची। हादसे वाली बिल्डिंग के प्रवेश द्वार पर एसी की पांच आउटर यूनिट और दो एग्जास्ट फैन लगे देख टीम ने विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। एसी &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">अलीगंज अग्निकांड मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बृहस्पतिवार को जलकल जोन-तीन कार्यालय का दौरा किया। इसके बाद टीम घटनास्थल पर भी पहुंची। हादसे वाली बिल्डिंग के प्रवेश द्वार पर एसी की पांच आउटर यूनिट और दो एग्जास्ट फैन लगे देख टीम ने विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। एसी की आउटर यूनिट और एग्जास्ट के चलते आने-जाने का एक मात्र रास्ता भी संकरा हो चुका था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक एनीमेशन कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग में सोमवार को भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद यह भी सामने आया कि अग्निशमन की गाड़ियां समय नहीं पहुंच पाई थीं। यह भी चर्चा थी कि गाड़ियों को दोबारा पानी लेने के लिए भी समस्या हुई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन बिंदुओं की जांच के लिए ही बृहस्पतिवार को एसआईटी अलीगंज सेक्टर-बी में थाने के पास स्थित जलकल जोन-तीन कार्यालय पहुंची थी। टीम ने यह पड़ताल की कि जरूरत पड़ते तो यहां से दमकल की कितनी गाड़ियों को पानी मिल सकता है। जलकल का यह कार्यालय घटना स्थल से करीब दो किमी दूरी पर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जलकल के अधिकारियों ने टीम को बताया कि जरूरत पड़ने पर भूमिगत जलाशय से एक साथ 100 गाड़ियों को पानी दिया जा सकता है। कार्यालय में जनरेटर की भी सुविधा है। यदि बिजली न हो तो भी पानी को पंप कर गाड़ियों में भरा जा सकता है।</p>
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		<title>UP: संस्कृत छात्रों को हाईस्कूल के बाद सीधे मिलेगा बीएएमएस में दाखिला</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101959</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 05:39:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में संस्कृत छात्रों के लिए खुशखबरी है। उन्हें हाईस्कूल के बाद अब सीधे बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) में दाखिला मिलेगा। इसके लिए प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू होंगे। ये गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर जिले में खुलेंगे। संस्कृत छात्रों को विभिन्न तरह के व्यावसायिक कोर्स से जोड़ा जा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश में संस्कृत छात्रों के लिए खुशखबरी है। उन्हें हाईस्कूल के बाद अब सीधे बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) में दाखिला मिलेगा। इसके लिए प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू होंगे। ये गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर जिले में खुलेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्कृत छात्रों को विभिन्न तरह के व्यावसायिक कोर्स से जोड़ा जा रहा है। इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने मिलकर पारंपरिक वैदिक मूल्यों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को जोड़ने के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया है। हर राज्य में आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू होंगे। इनमें बीएएमएस की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल तक संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा के जरिये दाखिला दिया जाएगा। इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स 7.5 साल का होगा। उत्तर प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू करने की तैयारी है। आयुष विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे होगा दाखिला</strong><br>आयुर्वेद के मूल ग्रंथ (जैसे- चरक संहिता, सुश्रुत संहिता) संस्कृत में हैं। केंद्रीय संस्कृत विवि नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। सभी आयुर्वेद गुरुकुलम् इसी विवि से संबद्ध होंगे। दाखिले के लिए विवि द्वारा प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। इसे पीएपी एनईईटी नाम दिया गया है। गुरुकुलम् के पास खुद का अस्पताल होगा। जहां छात्रों को व्यावहारिक और क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाएगी</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक वर्ष का होगा इंटर्नशिप</strong><br>यह एक आवासीय ग्रेजुएशन कोर्स है। 10वीं कक्षा के बाद छात्रों को आयुर्वेद डॉक्टर बनने का एक सीधा रास्ता देगा है। यह कोर्स 7.5 साल का होगा। पहले दो वर्ष तक प्री आयुर्वेद शिक्षा और फिर 4.5 वर्ष तक बीएएमएस की पढ़ाई होगी। साथ ही एक वर्ष इंटर्नशिप होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है आयुर्वेद गुरुकुलम्</strong><br>आयुर्वेद गुरुकुलम चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है। इसकी शुरुआत केंद्रीय संस्कृत विवि खुद के परिसरों में इसी वर्ष से करने की तैयारी में है। देश का सबसे पहला मुख्य आयुर्वेद गुरुकुलम् नासिक और दूसरा नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विवि में शुरू करने की तैयारी है। केरल में आयुर्वेद गुरुकुलम नाम से निजी पारंपरिक संस्थान व चिकित्सा केंद्र चल रहा है। यहां दुनिया भर के छात्रों को पंचकर्म, आयुर्वेद कॉस्मेटोलॉजी और पारंपरिक केरल चिकित्सा पद्धतियों में शॉर्ट टर्म और डिप्लोमा कोर्सेज कराता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) &nbsp;डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु का कहना है कि संस्कृत भाषा की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह बड़ा अवसर है। संस्कृत छात्र आयुर्वेद की मूल ग्रंथों की पढ़ाई करके चिकित्सक बनेंगे। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता सहित अन्य वेदों-पुराण का पाठ करेंगे। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जिसे एक साथ पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् का तोहफा मिला है।</p>
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		<title> इन वजहों से रातभर बदलते हैं आप करवटें…</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/101956</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 05:22:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न आने के कारणों के बारे में डिटेल में बात करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>थकान के बावजूद नींद न आने के कारण<br></strong>रात में नींद न आने के बहुत से कारण होते हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं:</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इंसोम्निया<br></strong>जब शरीर पूरी तरह से थकने के बाद भी रात में सो नहीं पाता तो इसे अक्सर इंसोम्निया कहा जाता है। इंसोम्निया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को सोने में परेशानी होने के साथ ही गंभीर मामलों में रातभर नींद तक नहीं आती।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तनाव और एंग्जाइटी<br></strong>सोते समय दिमाग में विचार आते रहना, किसी बात को लेकर लंबे समय से चिंता और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं स्लीप साइकल बिगाड़ देती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>थायरॉइड<br></strong>अगर आपका थायरॉइड लेवल बैलेंस नहीं है तो यह नींद न आने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अकेले नींद न आने की दिक्कत को थायरॉइड डिसऑर्डर से नहीं जोड़ा जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मेनोपॉज</strong><br>महिलाओं को नींद न आने की एक वजह मेनोपॉज भी है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इसके साथ अगर हॉट फ्लैश और पसीना बहुत आ रहा है तो इस संकेत को अनदेखा न करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दवाइयां<br></strong>ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी से बचने के लिए ली जा रही दवाइयां भी स्लीप साइकल बिगाड़ती हैं। इस बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बेहतर नींद के लिए टिप्स<br></strong>सोते समय कमरे में पर्याप्त अंधेरा होने के साथ हल्की ठंडक भी होनी चाहिए। वहीं, नींद के लिए शांति कितनी जरूरी है यह तो आप जानते ही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोने का एक समय तय करें ताकि बॉडी क्लॉक उसी तरह से खुद को ढाल पाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कैफीन, शराब, निकोटीन के सेवन और सोने के समय के बीच कम से कम 4-6 घंटे का गैप रखें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ज्यादा स्क्रीन टाइम भी स्लीप साइकल खराब करता है, सोने से 1 घंटे पहले ही मोबाइल और लैपटॉप अलग रख दें।</p>
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