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	<title>लाइफ-मंत्रा &#8211; UP Digital Diary</title>
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	<description>Hindi News &#38; Views</description>
	<lastBuildDate>Thu, 30 Apr 2026 04:55:07 +0000</lastBuildDate>
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	<title>लाइफ-मंत्रा &#8211; UP Digital Diary</title>
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		<title>लंच या डिनर के तुरंत बाद तरबूज खाने की न करें गलती!</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100307</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:55:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर ऐसे फूड्स का सहारा लेते हैं, जो शरीर में ठंडक बनाए रखे। तरबूज इन्हीं फूड्स में से एक है, पानी का बेहतरीन सोर्स होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। हाल ही में मुंबई में डिनर में बिरयानी खाने के बाद तरबूज &#8230;]]></description>
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<p>चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर ऐसे फूड्स का सहारा लेते हैं, जो शरीर में ठंडक बनाए रखे। तरबूज इन्हीं फूड्स में से एक है, पानी का बेहतरीन सोर्स होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है।</p>



<p>हाल ही में मुंबई में डिनर में बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत की खबर ने सभी को डरा दिया है। अब लोगों के मन में इसे लेकर तरह-तरह के सवाल आ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें, तो तरबूज हमेशा से ही एक हेल्दी फ्रूट रहा है और मुंबई के मामले में मौत की वजह तरबूज ही है, यह फिलहाल साफ नहीं हुआ है। ऐसे में इसे लेकर मन में कोई भी डर रखना बेकार ही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तरबूज से ब्लोटिंग!</h3>



<p>हालांकि, कुछ लोगों का पेट लंच या डिनर के तुरंत बाद तरबूज खाने से किसी गुब्बारे की तरह भारी होकर फूलने लगता है, लेकिन यह घबराने वाली बात नहीं है। आइए मेदांता अस्पताल, नोएडा में डायटेटिक्स डिपार्टमेंट की हेड डायटीशियन&nbsp;<em><strong>डॉ. निधि सहाय</strong></em>&nbsp;से जानते हैं&nbsp;क्यों खाने के बाद तरबूज खाने से ब्लोटिंग होती है और इसे खाने का सही नियम क्या है।</p>



<p><strong>ब्लोटिंग और तरबूज का कनेक्शन<br></strong>गर्मियों में हमारा पाचन (Digestion) नेचुरली थोड़ा सुस्त हो जाता है। शरीर अपना ज्यादातर फोकस हमारे बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करने में लगा देता है। अब ऐसे में जब हम कोई भारी खाना (प्रोटीन या फैट से भरपूर) खाते हैं, तो पेट उसे धीरे-धीरे पचाता है। वहीं, तरबूज में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, इसलिए यह पेट में जाते ही बहुत तेजी से पचता है।</p>



<p>ऐसे में जब आप कुछ भारी खाते हैं और उसके ऊपर से तरबूज खा लेते हैं, तो तरबूत पेट में जाकर बाकी खाने के पचने का इंतजार करने लगता है। इसी इंतजार की वजह से वह आंतों में फर्मेंट होने लगता है, जिससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है।</p>



<p><strong>इन लोगों को रहना चाहिए सावधान<br></strong>तरबूज में फ्रक्टोज, जो एक तरह का नेचुरल शुगर, की मात्रा काफी ज्यादा होती है। ऐसे में इसे खाने समय कुछ लोगों को अपना खास ध्यान रखना चाहिए, जो निम्न हैं-</p>



<p>इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) वाले लोगों को इसे संभलकर खाना चाहिए।<br>अगर आपका पाचन कमजोर है या आपको जल्दी एसिडिटी हो जाती है, खाने के तुरंत बाद तरबूज खाने से बचें।<br>सेंसिटिव गट वाले लोगों को फ्रक्टोज पचाने में परेशानी होती है, जिससे भयंकर गैस बन सकती है।</p>



<p><strong>तरबूज खाने का सही तरीका<br></strong>तरबूज कोई हानिकारक फल नहीं है, बल्कि यह गर्मियों का सुपरफूड है। बस इसे खाते समय की गई कुछ गलतियां इसे नुकसानदेह बना देती है। आइए जानते हैं तरबूज खाने का सही तरीका-</p>



<p>इसे हमेशा दो मील के बीच के समय जैसे मिड-मॉर्निंग या शाम को खाएं। लंच या डिनर के ठीक बाद इसे खाने से बचें।<br>तरबूज को दूध, दही या किसी तली-भुनी चीज के साथ बिल्कुल मिक्स न करें। इसे हमेशा अकेला ही खाएं।<br>एक बार में बहुत सारा तरबूज खाने से बचें। ज्यादा मात्रा पेट के एसिडिक बैलेंस को बिगाड़ सकती है।<br>फ्रिज से तुरंत निकाल कर बर्फ जैसा तरबूज खाने से बचें। पेट के तापमान और ठंडे फल के कारण हुए मिस्मैच से भी पाचन बिगड़ सकता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मामूली लगने वाली 3 आदतें चुपके-चुपके करती हैं किडनी डैमेज</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100277</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 05:22:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजमर्रा की कुछ आम आदतें जाने-अनजाने में आपकी किडनी को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं? इन गलतियों की वजह से किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती और शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।&#160; किडनी की बीमारियों का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि ये &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजमर्रा की कुछ आम आदतें जाने-अनजाने में आपकी किडनी को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं? इन गलतियों की वजह से किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती और शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।&nbsp;</p>



<p>किडनी की बीमारियों का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि ये एक साइलेंट किलर की तरह होती हैं; शुरुआत में इसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, आइए जानते हैं उन आदतों के बारे में जो चुपके-चुपके आपकी किडनी डैमेज कर रही हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सही मात्रा में पानी न पीना</h3>



<p>किडनी का सबसे अहम फंक्शन शरीर से यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे वेस्ट प्रोडक्ट्स को छानकर यूरिन के जरिए बाहर निकालना है। इसके लिए उसे भरपूर मात्रा में फ्लूएड की जरूरत होती है। जब आप कम पानी पीते हैं, तो किडनी को इन टॉक्सिन्स को छानने के लिए बहुत ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है। इससे पथरी होने और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<p>कई लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, किडनी उतनी साफ होगी। यह भी गलत है। ज्यादा पानी पीने से भी किडनी पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है और खून में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो सकता है।</p>



<p>इसलिए दिन भर में 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं और अपने पेशाब के रंग पर ध्यान दें; अगर यह हल्का पीला या पारदर्शी है, तो समझिए आप सही मात्रा में पानी पी रहे हैं।</p>



<p><strong>पेनकिलर्स का अंधाधुंध इस्तेमाल<br></strong>सिरदर्द हो या बदन दर्द, हम में से ज्यादातर लोग तुरंत मेडिकल स्टोर से पेनकिलर्स खरीद कर खा लेते हैं। यह आदत किडनी के लिए जहर के समान है। नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स किडनी की ओर जाने वाले ब्लड फ्लो को अचानक कम कर देती हैं। जो लोग लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनमें किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा डॉक्टर से पूछकर ही पेनकिलर दवाएं लें।</p>



<p><strong>खाने में ज्यादा नमक<br></strong>हमारा आधुनिक खान-पान, जिसमें प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, और अचार शामिल हैं, सोडियम से भरा होता है। ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण किडनी के नर्व्स डैमेज होने लगते हैं। साथ ही, ज्यादा नमक खाने से पेशाब के जरिए प्रोटीन बाहर निकलने लगती है, जो किडनी फेलियर का शुरुआती लक्षण है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>त्वचा ही नहीं, अब दिमाग को भी झुलसा रही है &#8216;हीटवेव&#8217;</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100247</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 04:54:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[आजकल की चिलचिलाती धूप और लू का असर सिर्फ हमारी त्वचा या शरीर की बाहरी सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग पर भी असर डाल रही है। नई दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉक्टर भास्कर शुक्ला के मुताबिक, लोग अक्सर सिरदर्द को थकान, कम नींद या ज्यादा स्क्रीन टाइम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आजकल की चिलचिलाती धूप और लू का असर सिर्फ हमारी त्वचा या शरीर की बाहरी सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग पर भी असर डाल रही है।</p>



<p>नई दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉक्टर भास्कर शुक्ला के मुताबिक, लोग अक्सर सिरदर्द को थकान, कम नींद या ज्यादा स्क्रीन टाइम का नतीजा मानकर हल्के में ले लेते हैं, लेकिन असल में, यह लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का एक गंभीर संकेत हो सकता है।</p>



<p>आइए, इस आर्टिकल में जान लीजिए कि कैसे बढ़ती गर्मी आपके दिमाग पर हावी हो रही है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।</p>



<p><strong>शरीर के साथ-साथ दिमाग में भी होती है पानी की कमी<br></strong>जब बाहर भयंकर गर्मी होती है, तो हमारे शरीर को अपने सामान्य तापमान को बनाए रखने और खुद को ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान शरीर में तेजी से डिहाइड्रेशन होने लगता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है, क्योंकि पानी की कमी के कारण दिमाग तक खून का बहाव और पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यही मुख्य कारण है कि लोगों को सिर भारी लगना, चक्कर आना और लगातार सिरदर्द जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।</p>



<p><strong>माइग्रेन के लिए &#8216;ट्रिगर&#8217; बन रही है गर्मी<br></strong>गर्मी का प्रभाव केवल शारीरिक नहीं होता, बल्कि यह हमारी मानसिक स्थिति को भी बिगाड़ता है। उमस और तेज धूप की वजह से लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, जल्दी थकान होती है और किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। दिमाग पर पड़ने वाला यह मानसिक दबाव सिरदर्द को और ज्यादा भड़का देता है। डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादा तापमान एक &#8216;ट्रिगर&#8217; की तरह काम करता है, जिसके कारण हीटवेव के दौरान माइग्रेन के अटैक काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।</p>



<p><strong>इलेक्ट्रोलाइट्स का बिगड़ता संतुलन है खतरनाक<br></strong>तेज धूप में ज्यादा देर तक रहने और पर्याप्त पानी न पीने से पसीने के जरिए शरीर से जरूरी तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है। यह असंतुलन सिरदर्द को जन्म देता है। खासतौर पर वे लोग जो बाहर धूप में काम करते हैं या जिन्हें लंबे समय तक सफर करना पड़ता है, वे इस खतरे की जद में सबसे ज्यादा होते हैं।</p>



<p><strong>गर्मी और सिरदर्द से बचने के लिए क्या करें?<br></strong>इस भीषण गर्मी और माइग्रेन से खुद को सुरक्षित रखने के लिए शरीर की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप इन बातों का पालन कर सकते हैं:</p>



<p>खूब पानी पिएं: दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो।<br>सिर को ढकें: धूप में बाहर निकलते समय हमेशा अपने सिर को किसी कपड़े, टोपी या छाते से ढक कर रखें।<br>हल्का भोजन लें: गरिष्ठ या भारी खाने के बजाय हल्का और शरीर को ठंडा रखने वाला भोजन करें।<br>धूप से बचें: ज्यादा लंबे समय तक सीधे तेज गर्मी और धूप के संपर्क में रहने से बचें।</p>



<p><strong>लापरवाही न करें<br></strong>आज के समय में सिरदर्द को एक आम-सी बात समझकर टाल देना बिल्कुल भी सही नहीं है। यह हमारे शरीर का एक इशारा है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खासकर इस चिलचिलाती गर्मी में, अगर आपको बार-बार सिरदर्द हो रहा है और उसके साथ कमजोरी, चक्कर या उल्टी महसूस हो रही है, तो यह खतरे की घंटी है। हमारा शरीर हमें यह चेतावनी देता है कि हीटवेव अब हमारे दिमाग तक पहुंच चुकी है, इसलिए समय रहते अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शरीर का &#8216;सिस्टम फेल&#8217; कर सकती है लिवर की ये बीमारी</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100219</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 05:31:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है जो बिना थके और बिना कोई शिकायत किए लगातार काम करता रहता है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के अलावा, इसका एक और बेहद खास काम है- खून का थक्का बनाने वाले जरूरी प्रोटीन का निर्माण करना। जी हां, अगर किसी कारण से लिवर कमजोर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है जो बिना थके और बिना कोई शिकायत किए लगातार काम करता रहता है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के अलावा, इसका एक और बेहद खास काम है- खून का थक्का बनाने वाले जरूरी प्रोटीन का निर्माण करना।</p>



<p>जी हां, अगर किसी कारण से लिवर कमजोर पड़ जाए और ये प्रोटीन न बना पाए, तो छोटी-सी चोट लगने पर भी खून का बहना रुकता नहीं है। विज्ञान की भाषा में इस जटिल समस्या को &#8216;लिवर कोएगुलोपैथी&#8217; कहा जाता है। आइए,&nbsp;<em><strong>डॉ. अमर दीप यादव</strong></em>&nbsp;(निदेशक एवं विभागाध्यक्ष, लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी, शल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल, दिल्ली) से इस बारे में डिटेल में समझते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जब लिवर काम करना बंद कर दे, तो शरीर में मचती है ये तबाही</h3>



<p>सुनने में शायद ऐसा लगे कि लिवर खराब होने पर सिर्फ खून बहने का खतरा रहता है, लेकिन असलियत इससे भी ज्यादा खतरनाक है। हमारा लिवर सिर्फ खून का थक्का जमाने वाले तत्व ही नहीं बनाता, बल्कि नसों में खून को बेवजह जमने से रोकने वाले प्राकृतिक तत्व भी तैयार करता है।</p>



<p>इसलिए, जब लिवर काम करना बंद कर देता है, तो मरीज को एक साथ दो बड़े खतरे घेर लेते हैं:<br>पहला, चोट लगने पर भयंकर खून बहना<br>दूसरा, नसों के अंदर जानलेवा थक्के जम जाना</p>



<p><strong>क्यों और कैसे पनपती है यह समस्या?<br></strong>आजकल की खराब लाइफस्टाइल, वायरल बीमारियां और शरीर की अंदरूनी गड़बड़ियां लिवर को नुकसान पहुंचाने के मुख्य कारण हैं। जब लिवर बीमार होता है, तो खून के पूरे सिस्टम पर इसका गहरा असर पड़ता है:</p>



<p>जरूरी प्रोटीन की कमी: लिवर &#8216;फाइब्रिनोजेन&#8217; और &#8216;प्रोथ्रोम्बिन&#8217; जैसे खास प्रोटीन नहीं बना पाता, जो खून का थक्का जमाने के लिए पहली जरूरत हैं।<br>विटामिन K को न सोख पाना: खून को सही समय पर जमने के लिए &#8216;विटामिन K&#8217; की दरकार होती है, लेकिन बीमार लिवर इसे शरीर में घुलने नहीं देता।<br>प्लेटलेट्स का गिरना: लिवर की बीमारी से शरीर की तिल्ली का आकार बढ़ जाता है। यह बढ़ी हुई तिल्ली खून में मौजूद प्लेटलेट्स को फंसाकर नष्ट करने लगती है, जिससे उनकी संख्या तेजी से गिर जाती है।<br>नसों में रुकावट का डर: शरीर में प्राकृतिक रूप से खून को पतला रखने वाले &#8216;प्रोटीन C&#8217; और &#8216;प्रोटीन S&#8217; की कमी हो जाती है, जिससे नसों में अवांछित थक्के बनने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।</p>



<p><strong>जानकारी की कमी और बढ़ता जोखिम<br></strong>दुर्भाग्य से, बहुत कम लोग लिवर के इस जरूरी काम के बारे में जानते हैं। ज्यादातर लोग लिवर की खराबी को केवल शराब के सेवन या कमजोर हाजमे से जोड़कर देखते हैं। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लिवर इतना सहनशील होता है कि यह अपनी बीमारी के शुरुआती संकेत नहीं देता। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।</p>



<p><strong>बचाव के आसान और असरदार तरीके<br></strong>इस छिपी हुई बीमारी को मात देने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आम लोगों के बीच रूटीन चेकअप और स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाए। अपने लिवर को तंदुरुस्त रखने के लिए आप कुछ बुनियादी कदम उठा सकते हैं:</p>



<p>बैलेंस डाइट लें: पोषण से भरपूर खाना खाएं जो लिवर पर दबाव न डाले।<br>शराब से पूरी तरह दूरी: लिवर को सुरक्षित रखने के लिए शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।<br>टीकाकरण करवाएं: हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचने के लिए समय पर वैक्सीन लें।<br>नियमित चेकअप: डॉक्टर से मिलते रहें और अपने शरीर की रूटीन जांच कराते रहें।</p>



<p>लिवर कोएगुलोपैथी सिर्फ एक बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का सुबूत है कि हमारे शरीर का हर हिस्सा एक-दूसरे पर कितना निर्भर है। लिवर की सेहत को नजरअंदाज करने से पूरे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके प्रति जागरूक रहना ही एक स्वस्थ और लंबी उम्र की असली चाबी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रोज नाश्ते में ब्रेड खाने की आदत शरीर के साथ करती है 5 खिलवाड़</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100189</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 04:42:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह-सुबह नाश्ता बनाने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे में, बटर टोस्ट, जैम-ब्रेड या सैंडविच हमारी पहली पसंद बन जाते हैं। बेशक ब्रेड एक आसान और जल्दी तैयार होने वाला ऑप्शन है, जिसे बच्चे हो या बड़े, सभी चाव से खाते हैं, लेकिन एक बड़ा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह-सुबह नाश्ता बनाने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे में, बटर टोस्ट, जैम-ब्रेड या सैंडविच हमारी पहली पसंद बन जाते हैं।</p>



<p>बेशक ब्रेड एक आसान और जल्दी तैयार होने वाला ऑप्शन है, जिसे बच्चे हो या बड़े, सभी चाव से खाते हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्या रोजाना नाश्ते में ब्रेड खाना आपके शरीर के लिए फायदेमंद है? आइए, दिल्ली के मैकक्योर और आस्था अस्पताल के जनरल फिजिशियन,&nbsp;<strong><em>डॉ. प्रतीक कुमार</em></strong>&nbsp;से समझते हैं कि रोजाना ब्रेड खाने से शरीर के अंदर क्या बदलाव आते हैं।</p>



<p><strong>इंस्टेंट एनर्जी, लेकिन जल्दी लगने वाली भूख<br></strong>ज्यादातर घरों में व्हाइट ब्रेड का इस्तेमाल होता है, जो मैदा यानी रिफाइंड आटे से बनी होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा और फाइबर काफी कम होता है। जब आप इसे खाते हैं, तो शरीर को फौरन एनर्जी मिल जाती है, लेकिन यह एनर्जी ज्यादा देर तक नहीं टिकती। नतीजा यह होता है कि आपको बहुत जल्दी दोबारा भूख लग जाती है और बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग होने लगती है।</p>



<p><strong>डायबिटीज का खतरा<br></strong>व्हाइट ब्रेड का एक बड़ा नुकसान यह है कि यह पेट में बहुत तेजी से पच जाती है, जिससे खून में शुगर का स्तर अचानक से बढ़ जाता है। अगर आप एक सुस्त लाइफस्टाइल जीते हैं और रोजाना ब्रेड खाते हैं, तो समय के साथ आपको &#8216;टाइप 2 डायबिटीज&#8217; होने का खतरा काफी बढ़ सकता है।</p>



<p><strong>शरीर में पोषण की कमी<br></strong>सिर्फ ब्रेड से पेट भरने का मतलब है कि आपके शरीर को जरूरी डाइट नहीं मिल रही है। ब्रेड में विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की भारी कमी होती है। अगर आप नियमित रूप से सिर्फ ब्रेड पर निर्भर रहते हैं, तो शरीर में इन जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है। इसके कारण आपको:</p>



<p>थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।<br>आपकी बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर पड़ सकती है।</p>



<p><strong>पेट की समस्याएं और &#8216;ग्लूटेन&#8217;<br></strong>कई लोगों को ब्रेड खाने के बाद पेट फूलने या गैस की शिकायत होती है। इसका मुख्य कारण गेहूं में पाया जाने वाला &#8216;ग्लूटेन&#8217; नामक तत्व होता है। जिन लोगों का शरीर ग्लूटेन को नहीं पचा पाता (ग्लूटेन इनटॉलरेंस या सेंसिटिविटी), उनके लिए रोजाना ब्रेड खाना पेट की परेशानियों को और ज्यादा बढ़ा सकता है।</p>



<p><strong>तेजी से बढ़ता हुआ वजन<br></strong>ब्रेड के साथ हम अक्सर बटर, जैम या अन्य प्रोसेस्ड स्प्रेड्स लगाकर खाते हैं। इससे आपके शरीर में जाने वाली कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। अगर इसे रोजाना इसी तरह खाया जाए, तो धीरे-धीरे आपका वजन बढ़ने की पूरी संभावना रहती है।</p>



<p><strong>क्या ब्रेड खाना पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?<br></strong>इसका जवाब है- नहीं! अगर आप सही टाइप की ब्रेड चुनें और उसे संतुलित मात्रा में खाएं, तो यह एक बेहतरीन और सुविधाजनक नाश्ता बन सकता है। इसके लिए आप ये आसान बदलाव कर सकते हैं:</p>



<p>सही ब्रेड चुनें: व्हाइट ब्रेड की जगह &#8216;ब्राउन ब्रेड&#8217; या &#8216;होल ग्रेन ब्रेड&#8217; को अपनी डाइट में शामिल करें। इनमें फाइबर और पोषक तत्व ज्यादा होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने में मदद करते हैं।<br>न्यूट्रिशन बढ़ाएं: अपने ब्रेड नाश्ते को हेल्दी बनाने के लिए इसमें प्रोटीन और फाइबर जरूर शामिल करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सावधान! प्रेग्नेंसी में मलेरिया बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100155</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 05:17:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[गर्भ में एक नए जीवन को संजोना एक बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान एक मां अपने होने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी नजरों से बच निकलने वाला एक छोटा-सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र &#8230;]]></description>
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<p>गर्भ में एक नए जीवन को संजोना एक बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान एक मां अपने होने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी नजरों से बच निकलने वाला एक छोटा-सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है?</p>



<p>आकाश हेल्थकेयर की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (डायरेक्टर और हेड),&nbsp;<em><strong>डॉ. मधुलिका सिन्हा</strong></em>&nbsp;बताती हैं कि प्रेग्नेंसी में मलेरिया को कभी भी एक सामान्य बुखार समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। आखिर इस नाजुक समय में मलेरिया इतना घातक क्यों हो जाता है? आइए इसे आसानी से समझते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शरीर की घटती ताकत और मलेरिया का बढ़ता खतरा</h3>



<p>प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। यही कारण है कि आम दिनों के मुकाबले गर्भावस्था में मलेरिया का संक्रमण शरीर पर ज्यादा तेजी से हावी हो सकता है और उनके लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।</p>



<p><strong>गर्भ में पल रहे बच्चे पर क्या होता है असर?<br></strong>यह बीमारी केवल होने वाली मां के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इसका सीधा और बुरा असर अजन्मे बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। डॉ. सिन्हा के मुताबिक, मलेरिया के कारण गर्भावस्था में कई तरह की गंभीर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं:</p>



<p>समय पूरा होने से पहले ही बच्चे का जन्म हो जाना (प्रीमैच्योर डिलीवरी)।<br>पैदा होने वाले शिशु का वजन सामान्य से बहुत कम होना।<br>कुछ गंभीर मामलों में मिसकैरेज हो जाने का खतरा।</p>



<p><strong>इन संकेतों को पहचानें और तुरंत लें एक्शन<br></strong>गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर शरीर में ये परेशानियां महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं:</p>



<p>अचानक तेज बुखार आना।<br>ठंड लगना या कंपकंपी महसूस होना।<br>पूरे शरीर में दर्द रहना।</p>



<p><strong>मच्छरों को दूर रखने के जरूरी उपाय<br></strong>इस खतरनाक बीमारी से बचने का सबसे कारगर तरीका मच्छरों को खुद से दूर रखना है। इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल किए जा सकते हैं:</p>



<p>सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।<br>घर के अंदर और बाहर के हिस्सों में पूरी साफ-सफाई रखें।<br>अपने घर के आस-पास गमलों, कूलरों या गड्डों में पानी इकट्ठा न होने दें, क्योंकि रुके हुए पानी में ही मच्छर पनपते हैं।</p>



<p><strong>सही समय पर इलाज है सबसे जरूरी<br></strong>डॉक्टर का मानना है कि इस बीमारी से डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सही समय पर इन लक्षणों की पहचान करके तुरंत डॉक्टरी जांच और इलाज शुरू करवा लिया जाए, तो मां और उनके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।</p>
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		<title>कहीं आपका दिल समय से पहले तो नहीं थक रहा?</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100124</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 04:31:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[हम अक्सर अपने दिल की तुलना एक घड़ी से करते हैं, जो बिना रुके धड़कती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अंदरूनी घड़ी की रफ्तार पर गौर किया है? मेडिकल भाषा में, आराम की स्थिति में (Resting Heart Rate या RHR) दिल का एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कना पूरी तरह &#8230;]]></description>
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<p>हम अक्सर अपने दिल की तुलना एक घड़ी से करते हैं, जो बिना रुके धड़कती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अंदरूनी घड़ी की रफ्तार पर गौर किया है?</p>



<p>मेडिकल भाषा में, आराम की स्थिति में (Resting Heart Rate या RHR) दिल का एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कना पूरी तरह से &#8220;नॉर्मल&#8221; माना जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर &#8216;सामान्य&#8217; आंकड़ा आपकी अच्छी सेहत की गारंटी नहीं होता। एक मिनट में 60 बार और 90 बार धड़कने वाले दिल की सेहत के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है।</p>



<p>आइए, हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट&nbsp;<strong><em>डॉ. सुधीर कुमार</em>&nbsp;</strong>से आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी धड़कन की रफ्तार कैसे आपके लंबे जीवन का राज खोलती है।</p>



<p><strong>&#8216;नॉर्मल&#8217; दिखने वाले आंकड़े का धोखा<br></strong>कई बड़े शोध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भले ही आपकी धड़कन 60-100 के &#8216;नॉर्मल&#8217; दायरे में हो, लेकिन जैसे-जैसे यह आंकड़ा ऊपर की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे इंसान की उम्र कम होने का जोखिम भी बढ़ने लगता है।</p>



<p>इसे ऐसे समझें- अगर आपके दिल की धड़कन में केवल 10 बीट्स प्रति मिनट का इजाफा होता है, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। जिस इंसान का दिल आराम करते समय 90 बार धड़क रहा है, वह 60 बार धड़कने वाले दिल की तुलना में बहुत ज्यादा तनाव झेल रहा है। एक दशक के समय में यह करोड़ों अतिरिक्त धड़कनों में बदल जाता है, जो आपकी नसों और धमनियों को बेवजह घिसाता और कमजोर करता है।</p>
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		<title>तेजी से वजन कम करने वाली महिलाओं को हो रही Ozempic Vulva की समस्या</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100095</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 05:47:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ-मंत्रा]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[हाल के कुछ समय में वजन घटाने वाली दवाओं, खासकर ओजेम्पिक की लोकप्रियता में काफी उछाल आया है। वजन कम करने में इस दवा के जादुई असर की अक्सर चर्चा होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी एक और बात काफी चर्चा में है। ओजेम्पिक फेस और ओजेम्पिक बट के बाद अब ओजेम्पिक वल्वा &#8230;]]></description>
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<p>हाल के कुछ समय में वजन घटाने वाली दवाओं, खासकर ओजेम्पिक की लोकप्रियता में काफी उछाल आया है। वजन कम करने में इस दवा के जादुई असर की अक्सर चर्चा होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी एक और बात काफी चर्चा में है।</p>



<p>ओजेम्पिक फेस और ओजेम्पिक बट के बाद अब ओजेम्पिक वल्वा शब्द काफी सुनाई दे रहा है। अगर आप इस शब्द को पहली बार सुन रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि यह कोई मेडिकल टर्म या बीमारी नहीं है, बल्कि एक ऐसा शब्द है जिसे महिलाओं ने वजन घटाने के बाद अपने शरीर में महसूस किए गए बदलावों को बयां करने के लिए गढ़ा है। आइए डॉ. प्रिया बंसल (सीनियर कंसल्टेंट गायनेकोलॉजी एंड गायनेऑन्कोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा) से जानें क्या है इसका मतलब और ये क्यों होता है?</p>



<p><strong>ओजेम्पिक वल्वा क्या है?<br></strong>ओजेम्पिक वल्वा एक नॉन-मेडिकल टर्म है। यह उन शारीरिक बदलावों को बताता है, जो महिलाएं अपने इंटिमेट एरिया में तेजी से वजन कम करने के दौरान अनुभव करती हैं। तेजी से वजन कम करने के कारण वल्वा के अपीयरेंस में बदलाव आ जाते हैं, जिससे उस एरिया की स्किन ढीली और रिंकल्स वाली लगने लगती है। यह दवा का डायरेक्ट साइड इफेक्ट नही है, बल्कि तेजी से वजन कम करने का परिणाम है।</p>



<p>जब कोई व्यक्ति ओजेम्पिक जैसी दवाओं की मदद से बहुत कम समय में भारी मात्रा में वजन घटाता है, तो उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों से फैट गायब होने लगता है। वेजाइना के बाहरी हिस्से के आसपास नेचुरल रूप से फैट टिश्यू होते हैं। वजन घटने पर इस हिस्से में कुछ बदलाव देखे जा सकते हैं, जैसे-</p>



<p><strong>वॉल्यूम में कमी- वेजाइना के आसपास का उभार कम हो जाना।<br></strong>त्वचा का ढीलापन- फैट कम होने के कारण वहां की त्वचा ढीली या लटकी हुई महसूस होना।<br>झुर्रियां- त्वचा के लचीलेपन में कमी आने से उस एरिया में झुर्रियां या रिंकल्ड अपीयरेंस आ जाना।<br>असहजता- कुछ मामलों में पैडिंगॉ कम होने से टाइट कपड़े पहनने पर हल्का दर्द या ड्राईनेस महसूस हो सकता है।</p>



<p><strong>इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?<br></strong>तेजी से फैट का कम होना- हमारा शरीर यह तय नहीं कर सकता कि उसे किस हिस्से से फैट पहले हटाना है। जब आप तेजी से वजन घटाते हैं, तो चेहरा, कूल्हे और ब्रेस्<br>के साथ-साथ वल्वा के लेबिया मेजोरा हिस्से से भी फैट कम होता है। यह हिस्सा मुख्य रूप से फैटी टिश्यू से बना होता है जो इसे भरा हुआ लुक देता है।<br>त्वचा का फ्लेक्सिबिलिटी- जब वजन धीरे-धीरे कम होता है, तो त्वचा को सिकुड़ने और नई शेप में ढलने का समय मिलता है। लेकिन ओजेम्पिक जैसी दवाओं के साथ वजन इतनी तेजी से गिरता है कि त्वचा उतनी तेजी से वापस अपनी जगह नहीं ले पाती, जिससे वह ढीली और झुर्रीदार नजर आने लगती है।<br>हार्मोनल बदलाव- तेजी से वजन घटने का सीधा असर शरीर के हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण उस एरिया में ड्राईनेस या सेंसिटिविटी बढ़ सकती है, जो असुविधा का कारण बनती है।</p>



<p><strong>क्या यह चिंता का विषय है?<br></strong>मेडिकल रूप से, ओजेम्पिक वल्वा आमतौर पर हानिकारक नहीं है। यह केवल एक कॉस्मेटिक बदलाव है। हालांकि, यह महिलाओं के आत्मविश्वास और बॉडी इमेज को प्रभावित कर सकता है। सबसे जरूरी बात यह है क हर महिला को यह अनुभव नहीं होता। यह इस पर निर्भर करता है कि आपने कितना वजन कम किया है, आपकी उम्र क्या है और आपकी त्वचा की जेनेटिक बनावट कैसी है।</p>



<p><strong>डॉक्टर की सलाह<br></strong>कोशिश करें कि धीरे-धीरे वजन कम हो। हाइड्रेशन का ध्यान रखें और प्रोटीन से भरपूर खाना खाएं, ताकि कोलेजन की कमी न हो। साथ ही, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करें और ज्यादा फ्रिकशन अवॉइड करें।</p>



<p>इसके अलावा, अगर इंटिमेट एरिया में ड्राईनेस, चॉफिंग की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह से मॉइश्चराइजर, हयाल्यूरॉनिक एसिड से भरपूर प्रोडक्ट्स या एनर्जी बेस्ड ट्रीटमेंट, जैसे- रेडियोफ्रीक्वेंसी, लेबियाप्लास्टी और फिलर्स की मदद ले सकते हैं। अगर प्राइवेट पार्ट में दर्द, घाव या वल्वा में असमानता दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।</p>
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		<title>क्या बुढ़ापे में अकेलापन सच में तेजी से कमजोर करता है याददाश्त?</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100040</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 04:33:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[अक्सर माना जाता है कि अकेलापन बुढ़ापे में मानसिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। लेकिन हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को एक नया मोड़ दिया है। शोध के अनुसार, अकेलापन बुजुर्गों की याददाश्त को शुरुआती तौर पर कमजोर जरूर कर सकता है, लेकिन यह मानसिक गिरावट की गति को &#8230;]]></description>
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<p>अक्सर माना जाता है कि अकेलापन बुढ़ापे में मानसिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। लेकिन हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को एक नया मोड़ दिया है। शोध के अनुसार, अकेलापन बुजुर्गों की याददाश्त को शुरुआती तौर पर कमजोर जरूर कर सकता है, लेकिन यह मानसिक गिरावट की गति को तेज नहीं करता।&nbsp;</p>



<p>इस बात को आसान शब्दों में कहें तो, अकेलापन दिमाग को थोड़ा सुस्त बना सकता है, पर यह उसे तेजी से बिगाड़ने या डिमेंशिया की ओर धकेलने की मुख्य वजह नहीं है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या कहता है नया शोध?</h2>



<p>एजिंग एंड मेंटल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में करीब 10,000 यूरोपीय बुजुर्गों को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की उम्र 65 से 94 वर्ष के बीच थी। यह शोध सर्वे ऑफ हेल्थ, एजिंग एंड रिटायरमेंट इन यूरोप के 2012 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने सात साल तक इन बुजुर्गों की मानसिक स्थिति और याददाश्त का बारीकी से विश्लेषण किया।</p>



<p>अध्ययन का सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जो लोग ज्यादा अकेलापन महसूस कर रहे थे, उनकी याददाश्त शोध की शुरुआत में अन्य लोगों की तुलना में कमजोर पाई गई। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीता, तो तीसरे से सातवें साल के बीच, उनकी याददाश्त में गिरावट की रफ्तार वैसी ही सामान्य रही जैसी उन लोगों में थी जो सामाजिक रूप से सक्रिय थे और अकेलापन महसूस नहीं करते थे।</p>



<p>अकेलेपन का शिकार कौन?</p>



<p>शोध के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 92 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कम या सामान्य स्तर का अकेलापन महसूस किया। वहीं, 8 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो गहरे अकेलेपन से जूझ रहे थे। इस समूह में कुछ खास समानताएं देखी गईं, जैसे-&nbsp; यह समूह उम्र में काफी बड़ा था, इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं और वे पहले से ही खराब स्वास्थ्य, डिप्रेशन, हाई बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">याददाश्त पर असर</h2>



<p>अध्ययन का रिजल्ट यह है कि अकेलापन और मानसिक गिरावट के बीच का संबंध उतना सीधा नहीं है जितना पहले समझा जाता था। शोध में देखा गया कि सात साल के समय के दौरान सभी समूहों में याददाश्त कम होने का पैटर्न लगभग एक जैसा ही रहा।</p>



<p>इसका मतलब यह है कि अकेलापन महसूस करने वाले व्यक्ति की याददाश्त का स्तर भले ही शुरुआत में थोड़ा कम हो, लेकिन समय के साथ उसकी मानसिक क्षमताएं अन्य बुजुर्गों की तुलना में ज्यादा तेजी से खत्म नहीं होतीं।&nbsp;</p>
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			</item>
		<item>
		<title>सिर्फ कैल्शियम की गोलियां खाने से मजबूत नहीं होतीं हड्डियां!</title>
		<link>https://updigitaldiary.in/news-article/100009</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UPDD Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:59:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ एंड फिटनेस]]></category>
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					<description><![CDATA[अक्सर जब भी हड्डियों की सेहत की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम कैल्शियम का आता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कैल्शियम हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन केवल सप्लीमेंट्स की गोलियां खा लेना हड्डियों की मजबूती की गारंटी नहीं है।&#160; हड्डियों की मजबूती के लिए कई &#8230;]]></description>
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<p>अक्सर जब भी हड्डियों की सेहत की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम कैल्शियम का आता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कैल्शियम हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन केवल सप्लीमेंट्स की गोलियां खा लेना हड्डियों की मजबूती की गारंटी नहीं है।&nbsp;</p>



<p>हड्डियों की मजबूती के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार होते हैं। इसलिए अगर आप भी केवल कैल्शियम के भरोसे बैठे हैं, तो आपको कुछ बदलाव करने की जरूरत है। आइए जानते हैं हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के अलावा और किन चीजों पर ध्यान देना जरूरी है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">विटामिन-डी3 के बिना कैल्शियम बेकार</h3>



<p>आप कितना भी कैल्शियम क्यों न खा लें, अगर आपके शरीर में विटामिन-डी की कमी है, तो आपका शरीर उस कैल्शियम को अब्जॉर्ब नहीं पाएगा। विटामिन-डी एक मीडियम की तरह काम करता है, जो कैल्शियम को खून से हड्डियों तक पहुंचाता है। इसलिए रोजाना 15-20 मिनट सुबह की धूप लें। अगर कमी ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विटामिन-के2 और मैग्नीशियम</h3>



<p>हड्डियों के निर्माण में मैग्नीशियम और विटामिन-के2 अहम भूमिका निभाते हैं। मैग्नीशियम कैल्शियम को हड्डियों से बांधने में मदद करता है, जबकि विटामिन-के2 यह ध्यान रखता है कि कैल्शियम हड्डियों में जाए, न कि आपकी आर्टरीज में जमा होकर उन्हें ब्लॉक कर दे। इसलिए हरी पत्तेदार सब्जियां, कद्दू के बीज, कीवी और बादाम खाएं।</p>



<p><strong>वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज<br></strong>हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए उन्हें थोड़ा स्ट्रेस देना जरूरी है। जब आप पैदल चलते हैं, दौड़ते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या वजन उठाते हैं, तो आपकी हड्डियों की डेंसिटी बढ़ती है, जिससे वे मजबूत बनते हैं। इसलिए सप्ताह में कम से कम 3-4 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या ब्रिस्क वॉकिंग शुरू करें।</p>



<p><strong>प्रोटीन को न करें नजरअंदाज<br></strong>प्रोटीन की कमी से कोलाजन कम होने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसलिए डाइट में दाल, पनीर, सोया, अंडे और लीन मीट जैसे प्रोटीन से भरपूर फूड्स शामिल करें।</p>



<p><strong>इन आदतों से बचें<br></strong>कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो आपके शरीर से कैल्शियम को बाहर निकाल देती हैं, जैसे-</p>



<p>ज्यादा नमक पेशाब के जरिए कैल्शियम को शरीर से बाहर निकाल देता है।<br>बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक हड्डियों की डेंसिटी को कम कर सकते हैं।</p>
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