चातुर्मास में कब कौन-सी एकादशी है?

सनातन धर्म में चातुर्मास का अधिक महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन समापन होता है। इस अवधि के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस बार 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी।

इस दौरान सृष्टि संचालन का भगवान शिव संभालते हैं। चातुर्मास की एकादशी तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी व्रत करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं चातुर्मास में कब कौन-सी एकादशी मनाई जाएगी।

चातुर्मास में कब-कब है एकादशी?
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। यह एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर कामिका एकादशी मनाई जाती है। यह व्रत 9 अगस्त को किया जाएगा।
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाई जाती है। श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को है।
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अजा एकादशी व्रत किया जाता है। यह एकादशी 07 सितंबर को मनाई जाएगी।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस बार यह एकादशी 22 सितंबर को है।
अश्विन माह कृष्ण पक्ष में इन्दिरा एकादशी पड़ती है। इस बार इन्दिरा एकादशी व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा।
अश्विन माह शुक्ल पक्ष में पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी व्रत 22 अक्टूबर को किया जाएगा।
कार्तिक माह माह में रमा एकादशी मनाई जाती है। इस बार रमा एकादशी व्रत 5 नवंबर को है।
कार्तिक माह माह के शुक्ल पक्ष में देवउठनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन चातुर्मास का समापन हो जाता है और तुलसी विवाह मनाया जाता है। इस बार देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है।

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