कश्मीर में लश्कर रच रहा षड्यंत्र

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में सुधरते सुरक्षा हालात और घटते आतंकी नेटवर्क से हताश आतंकी संगठन फिर घाटी में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा करने की साजिश में जुट गए हैं।
खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसका मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) आगामी दिनों में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के साथ-साथ अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।
दक्षिण कश्मीर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने के प्रयास में
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर आतंकी संगठन घाटी, विशेषकर दक्षिण कश्मीर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। आतंकियों के किसी भी षड्यंत्र को नाकाम बनाने के लिए सुरक्षाबल ने अपने आतंकरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। संभावित खतरों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
लोगों की सुरक्षा के लिए बरती जा रही सतर्कता
राजनीतिक नेताओं, अन्य राज्यों के श्रमिकों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों का उद्देश्य लक्षित हमलों के माध्यम से आम लोगों में डर पैदा करना और जम्मू-कश्मीर में सामान्य होते हालात को प्रभावित करना है। पिछले कुछ समय में सुरक्षाबल की लगातार कार्रवाई के चलते आतंकी संगठनों का नेटवर्क कमजोर हुआ है और बड़ी संख्या में उनके सक्रिय कैडर मारे गए हैं।
ऐसे में आतंकी संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए साफ्ट टारगेट को निशाना बनाने की फिराक में हैं। हाल के आतंकी हमले भी साजिश की ओर इशारा करते हैं। लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन टीआरएफ से जुड़े आतंकियों ने 22 जुलाई को अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की लक्षित हत्या की थी। इसके बाद शुक्रवार को कुलगाम जिले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाकर हत्या कर दी गई।
इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। खुफिया इनपुट के मुताबिक, आने वाले करीब 15 दिनों में आतंकी संगठन किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का प्रयास कर सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सख्त निर्देश
इसके मद्देनजर पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी है। प्रवेश और निकास मार्गों पर जांच कड़ी की जा रही है, वाहनों की तलाशी ली जा रही है।
इसके अलावा राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ-साथ प्रवासी श्रमिकों के ठहरने वाले स्थानों और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को दें। साथ ही लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से किसी विशिष्ट हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन उपलब्ध खुफिया सूचनाओं पर सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षाबल का उद्देश्य आतंकियों की किसी साजिश को समय रहते विफल करना और जम्मू-कश्मीर में शांति एवं सुरक्षा का माहौल बनाए रखना है।



