जो लोग कभी नहीं करते धूम्रपान, उन्हें भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर!

 लोगों में यह आम धारणा है कि धूम्रपान करने से ही फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है, जबकि कुछ तथ्य इसके एकदम उलट है। अब इसमें हाल ही में आए इस नए शोध को ही ले लीजिए। 

नया शोध कहता है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उनमें भी फेफड़ों का कैंसर देखा जा सकता है यानी जीवनशैली की बिगड़ी आदतों के विपरीत ऐसे कई कारण हैं, जो हमारे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। सिर्फ प्रभावित ही नहीं करते बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों तक का खतरा बढ़ा देते हैं। 

20 प्रतिशत मरीज ऐसे जिन्होंने कभी धूमपान नहीं किया

फेफड़ों के कैंसर वाले 20 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्होंने कभी धूमपान नहीं किया होता है। 33 लाख से अधिक लोगों के डाटा पर किए गए शोध में पता चला कि एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर (ईजीएफआर) जीन में एक दुर्लभ वंशानुगत म्यूटेशन (जेनेटिक बदलाव) फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को 25 गुना बढ़ा देता है। 

ईजीएफआर टी790एम नाम का यह म्यूटेशन धूमपान करने वालों में फेफड़ों का कैंसर होने के खतरे को 10 गुना बढ़ा देता है। यह शोध साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि जिन लोगों ने कभी धूमपान नहीं किया, उनमें इस म्यूटेशन वाले लोगों को, बिना म्यूटेशन वाले लोगों की तुलना में फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका 60 गुना से भी अधिक थी। 

जेनेटिक फेफड़ों के कैंसर का बढ़ रहा है खतरा 

नए शोध के मुताबिक, फेफड़ों के कैंसर में फ्यूजन प्रोटीन की भूमिका होती है। दरअसल, इसमें दो जीन आपस में असामान्य रूप से जुड़ जाते हैं, जिससे एक नया फ्यूजन प्रोटीन बनता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देता है। बोस्टन के डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता डॉ. जैकलिन लोपिकोलो ने कहा, “आज, फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग मुख्य रूप से धूमपान के इतिहास के आधार पर की जाती है।” 

“हमारी खोज से यह संभावना बनती है कि भविष्य में स्क्रीनिंग वंशानुगत जेनेटिक जोखिम के आधार पर भी की जा सकती है।” जान लेने वाली बात है कि यह वैरिएंट स्टडी किए गए 17 अन्य सामान्य कैंसरों में से किसी से भी जुड़ा नहीं पाया गया, यह तथ्य कहीं न कहीं यह साबित जरूर करता है कि इसका असर शायद मुख्य रूप से फेफड़ों के कैंसर तक ही सीमित है। 

Related Articles

Back to top button
T20: भारत का क्लीन स्वीप जानिये कितने खतरनाक हैं कबूतर। शतपावली: स्वस्थ रहने का एक आसान उपाय भारतीय मौसम की ALERT कलर कोडिंग In Uttar Pradesh Call in Emergency