दिल्ली: विरासत बचाने को दो करोड़ तक देगी सरकार…

दिल्ली के पुराने स्मारकों को संवारने और उनकी विरासत बचाने के लिए अब स्वैच्छिक संस्थाओं को दिल्ली सरकार आर्थिक मदद देगी। हमारे स्मारक, हमारा गौरव योजना के तहत सरकार किसी परियोजना की लागत का सामान्य तौर पर 75 फीसदी हिस्सा उठाएगी और एक वित्तीय वर्ष में प्रति परियोजना अधिकतम दो करोड़ रुपये की सहायता देगी।

दिल्ली के पुराने स्मारकों को संवारने और उनकी विरासत बचाने के लिए अब स्वैच्छिक संस्थाओं को दिल्ली सरकार आर्थिक मदद देगी। हमारे स्मारक, हमारा गौरव योजना के तहत सरकार किसी परियोजना की लागत का सामान्य तौर पर 75 फीसदी हिस्सा उठाएगी और एक वित्तीय वर्ष में प्रति परियोजना अधिकतम दो करोड़ रुपये की सहायता देगी। योजना दिल्ली मुख्यमंत्री हेरिटेज रिवाइवल स्कीम के तहत लागू की गई है।

श्रेणी-ए यानी अत्यधिक संरक्षित स्मारकों के संरक्षण में सरकार की हिस्सेदारी 90 फीसदी तक होगी। वहीं सरकारी संस्थाओं की परियोजनाओं के लिए 100 फीसदी तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। अजीमगंज की सराय और सरदार पटेल मार्ग स्थित मालचा महल जैसे स्मारकों के लिए जरूरत अधिक होने पर दो करोड़ रुपये की सीमा भी समिति की सिफारिश पर बढ़ाई जा सकेगी।

संस्था को देनी होगी 25 फीसदी हिस्सेदारी:
स्वैच्छिक संस्था को सामान्य परियोजना में 25 फीसदी राशि खुद लगानी होगी। एक संस्था एक वित्तीय वर्ष में केवल एक परियोजना के लिए आवेदन कर सकेगी। आवेदन के साथ परियोजना रिपोर्ट, विशेषज्ञों का विवरण, स्मारक के संभावित सार्वजनिक उपयोग और पर्यटकों के प्रबंधन की योजना देनी होगी। पर्यटन और स्थानीय समुदाय को होने वाले लाभ का भी ब्योरा देना होगा।

चार किस्तों में मिलेगा पैसा:
सरकार 30 फीसदी राशि अग्रिम देगी। इसके बाद काम 30 और 60 फीसदी पूरा होने पर 30-30 फीसदी तथा 90 फीसदी काम पूरा होने और ऑडिटेड उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा होने पर अंतिम 10 फीसदी जारी होगा। संस्थाओं को तिमाही प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। फंड के दुरुपयोग पर 10 फीसदी सालाना दंड ब्याज के साथ राशि वसूलने का प्रावधान है।

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