यूपी: में आयकर से होगी यूपी की सबसे बड़ी कमाई, लगातार बढ़ रही है इनकम टैक्स देने वालों की संख्या

केंद्रीय बजट में यूपी को मिलने वाले केंद्रीय करों की हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आमतौर पर देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य होने के कारण यूपी को सेंट्रल जीएसटी से सबसे अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। आंकड़ों के मुताबिक यूपी को सबसे ज्यादा कमाई इनकम टैक्स से होगी, जो राज्य की बढ़ती आय, रोजगार और टैक्स बेस के विस्तार का संकेत है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी राज्यवार वितरण तालिका के अनुसार यूपी को इनकम टैक्स के रूप में करीब 95698 करोड़ मिलने का अनुमान है। यह राज्य को मिलने वाली कुल केंद्रीय कर हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा है। इसके बाद कॉर्पोरेशन टैक्स से लगभग 78939 करोड़ रुपये और सेंट्रल जीएसटी से करीब 73546 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यानी केंद्र से मिलने वाले करों में सीजीएसटी यूपी की शीर्ष आय का स्रोत नहीं है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी को कस्टम ड्यूटी से 14347 करोड़ रुपये, यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6111 करोड़ रुपये और अन्य करों व शुल्कों से करीब 267 करोड़ रुपये मिलेंगे। सभी मदों को मिलाकर यूपी को केंद्र के करों में कुल 2.68 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की हिस्सेदारी मिलने का अनुमान है, जो देश में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों के मुताबिक इनकम टैक्स से बढ़ी कमाई का सीधा मतलब है कि राज्य में करदाताओं की संख्या बढ़ी है और लोगों की औसत आय में सुधार हुआ है। बीते कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप गतिविधियों, एमएसएमई विस्तार और संगठित रोजगार में वृद्धि से टैक्स नेटवर्क मजबूत हुआ है। इसका असर अब केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी में साफ दिख रहा है।

सीजीएसटी में कम हिस्सेदारी
सीजीएसटी में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी का कारण यह माना जा रहा है कि यूपी भले ही बड़ा उपभोक्ता राज्य है, लेकिन उत्पादन आधारित राज्यों की तुलना में यहां इनपुट टैक्स क्रेडिट और निर्यात आधारित गतिविधियां कम हैं। इसी वजह से जीएसटी में यूपी की हिस्सेदारी इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स से पीछे रह गई।

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