बलूच बागियों के सामने बेबस पाक सेना; ख्वाजा आसिफ ने बताई वजह

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों के सामने कमजोर पड़ रही है। उन्होंने विशाल भौगोलिक क्षेत्र और सैनिकों की तैनाती में आने वाली शारीरिक कठिनाइयों को इसका कारण बताया।
बलूचिस्तान में बीएलए के लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर कहर बनकर टूट रहे हैं और पाक आर्मी उनके सामने बेबस नजर आ रही है। अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस बात को माना है कि उनकी सेना इन लड़कों के सामने कमजोर पड़ गई है।
उनकी यह टिप्पणी बलूच विद्रोहियों द्वारा इस अशांत प्रांत के कई शहरों में एक साथ हमले करने के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें कम से कम 80 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 30 से ज्यादा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, “भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है… इसे कंट्रोल करना किसी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है और इसके लिए बड़ी संख्या में सेना की तैनाती की जरूरत होती है। हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की रखवाली और पेट्रोलिंग करने में उन्हें शारीरिक रूप से दिक्कत होती है।”
बीएलए से बातचीत करने से इनकार
ख्वाजा आसिफ ने बागी ग्रुप बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) से बातचीत से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिकों को मारने वाले “आतंकवादियों” के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।
उन्होंने दावा किया कि अपराधियों और अलगाववादी ग्रुपों के बीच सांठगांठ है, जिसमें आपराधिक गैंग बीएलए के बैनर तले काम कर रहे हैं। आसिफ ने कहा, “बलूचिस्तान में कबायली बुजुर्गों, नौकरशाही और अलगाववादी आंदोलन चलाने वालों ने एक गठजोड़ बना लिया है।” उन्होंने दावा किया कि पहले तस्कर तेल की तस्करी से हर दिन 4 अरब पाकिस्तानी रुपये तक कमाते थे।
पाक सेना पर कहर बनकर टूटे बलूच बागी
बलूच बागियों ने कम से कम 12 जगहों पर एक साथ हमले किए, जिससे हाल के सालों में सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में से एक पैदा हो गया।
अधिकारियों ने कहा है कि पूरे प्रांत में बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियानों में कम से कम 177 विद्रोहियों को मार गिराया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में हुई हिंसा में कम से कम 33 आम नागरिक और सुरक्षा बलों के 17 जवान मारे गए।



