PFC बोर्ड ने REC के साथ विलय को दी मंजूरी, सरकार की 52.63% हिस्सेदारी खरीदी

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) के बोर्ड ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के साथ विलय को मंजूरी दे दी है। PFC ने REC में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी हासिल की है। यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की NBFCs में दक्षता बढ़ाने और पुनर्गठन के लिए उठाया गया है, जैसा कि बजट में प्रस्तावित था। REC ने बिजली और गैर-बिजली दोनों क्षेत्रों में अपना वित्तपोषण विस्तार किया है।

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (REC) के साथ मर्जर को मंजूरी दे दी है। PFC ने कहा कि इसने REC में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी हासिल कर ली है यानी खरीद ली है। PFC ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, “आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) की ‘सैद्धांतिक’ मंजूरी के बाद, PFC ने REC में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी हासिल कर ली है। इसके अनुसार, PFC और REC होल्डिंग और सब्सिडियरी कंपनियों के तौर पर काम कर रही हैं।” इसमें PFC होल्डिंग और REC सब्सिडियरी कंपनी के तौर पर काम करेगी।

बजट में वित्त मंत्री ने किया था एलान
बजट 2026 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि विकसित भारत के लिए NBFC का विजन क्रेडिट डिस्ट्रिब्यूशन और टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए साफ लक्ष्यों के साथ बताया गया है। पब्लिक सेक्टर NBFC में स्केल हासिल करने और एफिशिएंसी बेहतर बनाने के लिए, पहले कदम के तौर पर, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन के रीस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव है।

REC ने खूब फैलाया है कारोबार
PFC, बिजली मंत्रालय के तहत एक पब्लिक कंपनी है और देश की एक प्रमुख नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कॉरपोरेशन है। REC ने अपने फाइनेंसिंग मैंडेट को डेवलप और उसका विस्तार किया है ताकि पूरे पावर-इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कवर किया जा सके, जिसमें जनरेशन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नई टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
हाल ही में REC ने नॉन-पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी एंट्री की है, जिसमें सड़कें और हाईवे, मेट्रो रेल, एयरपोर्ट, पोर्ट, IT कम्युनिकेशन आदि शामिल हैं।

भारत को 450 अरब डॉलर की जरूरत
पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल के अनुसार, भारत को अपनी इकोनॉमी को तेजी से इलेक्ट्रिफाई करने के लिए अगले सात सालों में नए पावर प्लांट, ट्रांसमिशन लाइन और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बनाने के लिए $450 बिलियन की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत, जो अभी ग्लोबल औसत का एक तिहाई है, 2047 तक तीन गुना होने की उम्मीद है, जो उस समय तक डेवलप देश का दर्जा हासिल करने के सरकार के लक्ष्य के साथ मेल खाता है।

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