पाकिस्तानी सेना vs तालिबानी लड़ाके, आधुनिक हथियारों से लैस PAK के लिए क्यों बड़ी चुनौती है अफगानिस्तान?

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है, जिसका अफगानिस्तान भी जवाब दे रहा है। सैन्य रूप से पाकिस्तान मजबूत है, लेकिन लंबा संघर्ष होने पर अफगान तालिबान गुरिल्ला युद्ध बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पाकिस्तान ने अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान के खिलाफ खुलेआम युद्ध छेड़ दिया है और अफगानिस्तान भी मुंह तोड़ जवाब दे रहा है। सैन्य दृष्टि से पाकिस्तान का पलड़ा भारी होने के बावजूद अगर संघर्ष लंबा चला तो अफगान तालिबान पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। आइये जानते हैं कैसे…..
पूर्व अफगान सरकार व अमेरिकी सेना के हथियार
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के पास पूर्व अफगान और विदेशी सेनाओ द्वारा छोड़े गए सैन्य उपकरण मौजूद हैं। अफगानिस्तान काफी हद तक अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए सैन्य उपकरणों और साजो-सामान पर निर्भर है।
अफगान सेना सोवियत-युग के मुख्य युद्धक टैंक, बख्तरबंद गाड़ियों और स्वायत्त वाहनों सहित लड़ाकू विमानों का भी उपयोग करती है, लेकिन इनकी सटीक संख्या अज्ञात है। उनके पास मौजूद तोपखाने की सटीक संख्या भी ज्ञात नहीं है, जो कम से कम तीन अलग-अलग प्रकार के हैं।
गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं अफगान लड़ाके
अफगान सेना को गुरिल्ला युद्ध में महारत हासिल है, क्योंकि उसने दशकों तक अमेरिका और सोवियत संघ जैसी महाशक्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। भारी भरकम सैन्य शक्ति के बावजूद इन दोनों को पीछे हटना पड़ा था। अफगान सेना को भौगोलिक स्थिति का भी मजबूत लाभ प्राप्त है, जहां वे छिप सकते हैं, भाग सकते हैं और घात लगाकर हमले कर सकते हैं।
अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान में पूरी ताकत से युद्ध छेड़ने का फैसला करता है, तो उसे भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के लंबे युद्ध में अफगानिस्तान की युद्ध विशेषज्ञता उसकी मदद करेगी और पाकिस्तानी सेना के लिए काफी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अगर युद्ध छोटा हुआ तो पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहेगा।
6.6 लाख सक्रिय कर्मी हैं पाकिस्तान के सेनाओं में, इनमें से 5.6 लाख थल सेना में, 70,000 वायु सेना में और 30,000 नौसेना मे हैं
1.72 लाख सक्रिय कर्मी हैं अफगानिस्तान की सेना में, वह इस संख्या को बढ़ाकर 2 लाख करने का प्रयास कर रही है
14-वें स्थान पर है वैश्विक सैन्य रैकिंग में पाकिस्तान ग्लोबलफायरपावर नामक सैन्य डाटा विश्लेषण वेबसाइट के अनुसार
वहीं, 145 देशों में 121वें स्थान पर अफगानिस्तान है
हवाई हमले की क्षमता
रिपोटों से पता चलता है कि प्रतिबंधों के बावजूद अफगान तालिबान ने ब्लैक मार्केट से कुछ सैन्य उपकरण खरीदने में कामयाबी हासिल की है। अभी तक, इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि उसके पास कितने विमान हैं या पाकिस्तान में गहराई तक हवाई हमले करने की क्षमता है या नहीं क्योंकि तालिबान सरकार विदेशी पत्रकारों को आसानी से पहुंच की अनुमति नहीं देती है।
हालिया गतिरोध में, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान में लक्ष्यों पर हमले करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। ड्रोन, जो सस्ते, छोटे और उपयोग में आसान हैं, निस्संदेह इस संघर्ष की प्रकृति को बदल सकते हैं।



