अमेरिका ने ईरान को दी आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी

अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तीखे बयानों का दौर जारी रहा। इन प्रतिबंधों का असर इस्लामिक रिपब्लिक और तेहरान के सबसे अहम व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है। इन साझेदारों में चीन भी शामिल है।

इकोनॉमिक टाइम्स में रविवार को छपे एक लेख में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी कि ईरान के लिए आर्थिक डी-डे (निर्णायक दिन) आने वाला है और तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को आगाह किया। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि यह आर्थिक युद्ध किस तरह होगा।

स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा?

सोमवार को दोपहर 2 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक दिन पहले उन्होंने लिखा, “सुबह होते ही एक आर्थिक डी-डे शुरू हो जाएगा। यह किसी विरोधी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला होगा।”

बेसेंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बात दोहराते हुए कहा, “दुनिया को यह समझना चाहिए कि हमारा मकसद ईरान की उस हर आर्थिक जीवन-रेखा को काटना है जो उसके दमनकारी शासन को बनाए रखती है, ताकि तेहरान अकेला पड़ जाए।” ट्रंप ने ही पिछले हफ्ते ईरान के खिलाफ इकोनॉमिक डी-डे की धमकी दी थी।

ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को भी यूएस की वॉर्निंग

अमेरिका ने तेहरान के बिजनेस पार्टनर को भारी आर्थिक नतीजों की चेतावनी भी दी है। बेसेंट ने अपने लेख में लिखा, “ईरान की मदद करने वाले देश उसका पेट्रोलियम खरीदते और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं। वे समुद्र के रास्ते होने वाले ईंधन के लेन-देन और अपने बैंकों के गलत इस्तेमाल को नजरअंदाज करते हैं और साथ ही अपनी मिलीभगत को छिपाते भी हैं। ये देश ईरान की सरकार को खुश रखने को ही ज्यादा सुरक्षित रास्ता मानते हैं लेकिन उन्हें इस बात के नतीजों पर भी जरूर सोचना चाहिए कि ऐसा करते रहने से क्या होगा।”

‘दिया जाएगा निर्णायक जवाब’

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने आर्थिक कार्रवाई का जवाब कठोर सैन्य बल से दिया तो ट्रंप तेजी से और निर्णायक रूप से जवाब देंगे। बाद में एक्स पर बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म कर दिया है, उसकी लगभग 100 प्रतिशत सैन्य फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब हम निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ने सुरक्षा की गारंटी के नाम पर जबरन वसूली करके अपना अस्तित्व बनाए रखा है। उसे इस सोच से ताकत मिली है कि ईरान का पलटवार तो तय है लेकिन अमेरिका की कार्रवाई पर बातचीत हो सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप के दौर में यह समय खत्म हो चुका है और जो लोग तेहरान का विरोध करने के खतरे से डरते हैं उन्हें वॉशिंगटन को आजमाने की कीमत को कम नहीं आंकना चाहिए।”

ईरान ने किया पलटवार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंधों के बारे में अमेरिका की जल्द होने वाली घोषणा संयुक्त राष्ट्र के हर स्वतंत्र सदस्य देश पर देश की सीमा के बाहर अधिकार क्षेत्र जताने जैसा है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “इस तरह के सेकेंडरी प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है।”

ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान, अमेरिका के ईरान-विरोधी आर्थिक अभियान में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।

एक पोस्ट में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने कहा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो तेल की एक बूंद भी एक्सपोर्ट नहीं की जाएगी। न तो होर्मुज स्ट्रेट से और न ही फारस की खाड़ी में कहीं से भी। ईरान, ईरानी लोगों के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।”

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