जानिए कैसे रंगभरी एकादशी के दिन करनी चाहिए पूजा,जानें इसका महत्व

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी मनाई जाती है। आप सभी जानते ही होंगे एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी के साथ आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी, आमलका एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता हैं। जी हाँ और इसी के साथ रंगभरी एकादशी एकमात्र एकादशी है जिसका संबंध भगवान शंकर व माता पार्वती से है। वहीँ इस साल आमलकी एकादशी उदयातिथि के अनुसार 14 मार्च को मनाई जाएगी। तो आइए जानते हैं आमलकी एकादशी पूजा विधि।

आमलकी एकादशी पूजा विधि- भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें। उसके बाद सबसे पहले वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें। अब इसके बाद पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें। इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करें। इसके बाद कलश में सुगंधी और पंच रत्न रखें। इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रखें। कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं।

अब अंत में कलश के ऊपर श्री विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुरामजी की पूजा करें। इसके बाद रात्रि में भगवत कथा व भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें। अब द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा दें साथ ही परशुराम की मूर्तिसहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें। अब अंत में भोजन ग्रहण करें।

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