हम बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के भीतर चिड़ियाघर बनाए जाने की आवश्यकता की समीक्षा नहीं कर रहे- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बाघ अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में संरक्षित क्षेत्रों के अंदर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में चिड़ियाघर बनाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की पीठ ने राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य प्राधिकरण (एनटीसीए) को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

राष्ट्रीय उद्यानों में चिड़ियाघर बनाए जाने की आवश्यकता की समीक्षा 

पीठ बाघ अभयारण्यों में अवैध निर्माण और इसके बफर क्षेत्र में टाइगर सफारी शुरू करने जैसे मुद्दे को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट से भी अवगत कराया गया, जिसमें उसने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से बाघ अभयारण्यों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर चिड़ियाघर तथा सफारी बनाने से संबंधित दिशा-निर्देश वापस लेने को कहा है। पीठ ने कहा कि प्रथम हम बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के भीतर चिड़ियाघर बनाए जाने की आवश्यकता की समीक्षा नहीं कर रहे हैं।

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