चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि व्यक्ति को संकट के समय कैसा व्यवहार रखना चाहिए..

भविष्य में आने वाली समस्याओं का अनुमान लगाना मुश्किल कार्य है। लेकिन उन समस्याओं से बचने के लिए या उनसे निपटने के लिए महापुरुषों द्वारा दिए गए ज्ञान का सहारा अवश्य लिया जा सकता है। ऐसे ही एक महापुरुष थे आचार्य चाणक्य, जिन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से कई भटके हुए युवाओं को सही मार्ग दिखाया था और वर्तमान समय में उनके द्वारा रचित चाणक्य नीति इस कार्य को पूरा कर रही है। बता दें कि चाणक्य नीति का पालन कर कई युवा सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। आज चाणक्य नीति के इस भाग में हम बात करेंगे कि एक व्यक्ति को विपरीत परिस्थितयों में किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। आइए जानते हैं-

मुश्किल के समय में रखें इन बातों का ध्यान

प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।

सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधवः ।।

चाणक्य नीति के अनुसार जिस अथाह सागर को हम सभी गंभीर समझते हैं, वही प्रलय आने पर विकराल रूप धारण कर लेता है और अपनी मर्यादाओं को भूलता हुआ जल-थल एक देता है। किन्तु श्रेष्ठ एवं साधु व्यक्ति संकटों का पहाड़ टूट जाने पर भी अपना संयम नहीं त्यागता है और अपनी बुद्धिमानी से उन समस्याओं का समाधान निकालता है। ऐसे ही श्रेष्ठ व्यक्ति को सागर से भी महान कहा जाता है। इसलिए व्यक्ति को मुश्किल के समय अपना संयम नहीं खोना चाहिए, अन्यथा वह और अधिक मुश्किलों में पड़ सकता है। जबकि, इस स्थिति में शांत रहते हुए उन समस्याओं से कैसे बचा जाए इसकी तैयारी करनी चाहिए।

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