आसान भाषा में समझें सेविंग और सैलरी अकाउंट में क्या होता है अंतर?

आज के समय हम में से अधिकतर लोगों का बैंक में खाता है। अर्थव्यवस्था को एक नया रूप देने में बैंकिंग ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। इससे देश के नागरिकों को काफी फायदा पहुंचा है। बैंक में आपके बचत के पैसे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। यही नहीं बैंक में जमा पैसों पर आपको समय-सयम पर अच्छी ब्याज दर भी मिलती है। इसके अलावा बैंक आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग करने में अच्छी मदद करता है। इसके अलावा आप जरूरत के समय यहां से लोन भी ले सकते हैं। हालांकि, बैंक में जब भी हम अपना खाता खुलवाने के लिए जाते हैं, उस दौरान हमें सेविंग, करंट और सैलरी अकाउंट के ऑप्शन मिलते हैं। हालांकि, इनमें सेविंग और सैलरी अकाउंट प्रमुख होता है। ज्यादातर लोग अपना सेविंग बैंक अकाउंट या फिर सैलरी अकाउंट खुलवाते हैं। वहीं क्या आपको इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में पता है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं –
बचत खाता
यह व्यक्तिगत बचत खाता होता है। इस अकाउंट के खोले जाने का मुख्य उद्देश्य सेविंग करना है। गौर करने वाली बात यह है कि सेविंग अकाउंट में किसी प्रकार के न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती है।

हालांकि, कुछ बैंक ऐसे हैं जहां आपको न्यूनतम बैंक बैलेंस रखने की जरूरत होती है। सेविंग अकाउंट में जो ब्याज दर मिलती है। वह सैलरी अकाउंट की तुलना में कम होती है। सेविंग अकाउंट में आपको चेकबुक, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

सैलरी अकाउंट
यह खाता कर्मचारी के वेतन भुगतान को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। आमतौर पर सैलरी अकाउंट में कोई न्यूनतम बैलेंस नहीं होता है। सैलरी अकाउंट में आपको सेविंग अकाउंट की तुलना में ज्यादा ब्याज दर मिलती है।

सैलरी अकाउंट में आपको कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इसमें चेकबुक, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि शामिल हैं। ऐसे में अगर आप बचत करने के लिए अपना खाता खुलवाना चाहते हैं, तो सेविंग अकाउंट आपके लिए अच्छा है। वहीं अगर आप सैलरीड हैं, तो इस स्थिति में आप सैलरी अकाउंट खुलवा सकते हैं।

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