“बिहार में शराबबंदी का प्रभाव जानने के लिए फिर से होगा सर्वे”: मुख्यमंत्री नीतीश

पेंड्रा: सरकार गांव-गांव में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से कितने ही इलाज के लाख दावे कर ले, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर गांव-गांव में स्वास्थ माफिया चलाकर प्रतिदिन ना जाने कितने ही लोगों को मौत के घाट उतार रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गौरेला के समीपस्थ गांव ठेंगादाढ़ का है। जहां मंगल सिंह राठौर के घर में 5 साल के मासूम अंकुश राठौर की 23 अक्टूबर की रात लगभग 2:30 बजे हल्का बुखार आया तो उसके माता-पिता उसे सुबह 10:00 बजे गांव में ही निवास करने वाले झोलाछाप डॉक्टर रामसिंह राठौर जो खोडरी गांव में अपनी निजी क्लीनिक खोलकर इलाज कर रहा है। उसके पास लेकर गए बिना कुछ जांच पड़ताल एवं प्रशिक्षण किए बगैर झोलाछाप डॉक्टर रामसिंह राठौर ने बच्चे के नस में इंजेक्शन मोनोसेफ लगाया इंजेक्शन लगाने के 5 से 7 मिनट बाद ही मासूम बच्चे अंकुश की तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने तुरंत उसको एविल इंजेक्शन लगाया।

इसके बाद भी उसके तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो नसों के माध्यम से उसे ड्रिप चढ़ाने लगा शरीर ठंडा पड़ने लगा और जब बच्चा शांत हो गया, तो चिकित्सक झोलाछाप डॉक्टर ने मृत बच्चे को लेकर उसके परिवार के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पेंड्रारोड में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के पास स्वयं लेकर आया परंतु चिकित्सक ने यहां उसे मृत बताते हुए ले जाने को कहा और झोलाछाप डॉक्टर वापस मृत मासूम बच्चे के शव को वापस पीड़ित माता-पिता के घर लाकर छोड़ दिया और कहने लगा कि इसकी कहीं भी शिकायत करोगे तो पोस्टमार्टम करना पड़ेगा यह कहते हुए उन्हें शांत रहने के लिए 10000 दिए मामले को अब लगभग 20 से 25 दिन बीत गए हैं। झोलाछाप डॉक्टर अपने क्लीनिक में नहीं है।

वहीं डॉक्टर की क्लीनिक में बड़ी मात्रा में दवाइयां उपलब्ध थी परंतु झोलाछाप डॉक्टर मौके पर नहीं था। पूरे मामले की जानकारी हमने जब जिला चिकित्सा अधिकारी को दी तो मामले में संज्ञान मिलने के बाद नोडल अधिकारी से जांच कार्यवाही की बात की है। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा झोलाछाप डॉक्टर द्वारा ले गए। मृत बच्चे के शव को प्रशिक्षण के बाद वापस बिना पुलिस सूचना के भेजने के बाद जानकारी एवं जांच के बाद उचित कार्रवाई करने की बात की है।

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