धागों में बुनी भारत की विरासत: जयपुर से कश्मीर तक, जानिए इन शहरों की अनूठी बुनाई शैलियां

भारत अपनी सदियों पुरानी कपड़ा कला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां के हर राज्य की जलवायु, इतिहास और भूगोल ने वहां के कपड़ों और बुनाई की शैली को एक खास पहचान दी है। अलग-अलग क्षेत्रों की अनूठी कपड़ा कलाएं उनकी स्थानीय संस्कृति और प्रकृति को दिखाती हैं।

भारत केवल अपनी संस्कृति और खान-पान के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी कपड़ा कला के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है।
यहां के हर राज्य की जलवायु, इतिहास और भूगोल ने वहां के कपड़ों और बुनाई की शैली को एक खास पहचान दी है। आइए, भारत के पांच ऐसे क्षेत्रों की यात्रा करते हैं, जहां के टेक्सटाइल वहां की आत्मा की तरह हैं।

जयपुर, राजस्थान
गुलाबी नगरी जयपुर अपने रंगों के जादू के लिए जानी जाती है। यहां की टेक्सटाइल कला प्रकृति और मौसमों से प्रेरित है-
लहरिया- बहती लहरों जैसा यह पैटर्न राजस्थान के रेतीले लहरों और उत्सवों का प्रतीक है।
सांगानेरी और बगरू प्रिंट- बारीक फूलों वाले सांगानेरी प्रिंट और मिट्टी की महक वाले दाबू व बगरू ब्लॉक प्रिंट हस्तशिल्प का बेहतरीन नमूना हैं। यह कला लकड़ी के ब्लॉकों के जरिए कपड़ों पर जिंदा हो उठती है।

श्रीनगर, कश्मीर
कश्मीर की टेक्सटाइल पहचान वहां की सर्दी, बागों और प्राकृतिक सुंदरता में बसी है।
कश्मीरी शॉल- पश्मीना और कानी शॉल अपनी कोमलता और गर्माहट के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।
बारीक कढ़ाई- यहां की सुई वाली कढ़ाई इतनी बारीक होती है कि इसे पूरा होने में महीनों लग जाते हैं। इसके मोटिफ्स अक्सर घाटी के फूलों, पानी की लहरों और बदलते मौसमों से प्रेरित होते हैं, जो कश्मीर की शांत पहचान को दिखाते हैं।

अलेप्पी, केरल
केरल का टेक्सटाइल वहां के बैकवाटर्स और मंदिरों से प्रेरित है।

कसावू- सफेद या क्रीम रंग के सूती कपड़ों पर सुनहरी जरी का बॉर्डर केरल की पहचान है। यह सादगी और भव्यता का एक अनोखा मेल है।
बुनावट- यहां के सूती वस्त्र वहां के उमस भरे मौसम के अनुकूल होते हैं, जिनमें बारीक विवरण और साफ-सुथरे बॉर्डर स्थानीय जीवन की लय को दिखाते हैं।

गंगटोक, सिक्किम
सिक्किम के कपड़े वहां के पहाड़ी जीवन और ठंड को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं।

लेप्चा और भूटिया टेक्सटाइल- ऊन और कपास से बुने गए इन कपड़ों में धारियों का सुंदर इस्तेमाल होता है।
पैटर्न- यहां की बुनाई बहुत ही नपी-तुली और बारीक होती है, जिसमें रंगों का चयन पहाड़ियों के प्राकृतिक रंग से किया जाता है। ये न केवल दिखने में सुंदर हैं, बल्कि पहाड़ों के मुश्किल जीवन के लिए बेहद टिकाऊ भी होते हैं।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश
लखनऊ की पहचान उसकी नजाकत से है और यह नजाकत यहां की चिकनकारी में साफ झलकती है।

बारीक टांके- चिकनकारी केवल एक कढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य और कला का मेल है। सफेद मलमल पर सफेद धागे से की गई यह नक्काशी अपनी सादगी के लिए मशहूर है। यह कला तड़क-भड़क के बजाय बारीकी पर आधारित है, जो अवध क्षेत्र की तहजीब को आज भी जिंदा रखे हुए है।

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