चैत्र नवरात्र के दौरान भूलकर भी न करें ये काम, वरना व्रत रह जाएगा अधूरा

चैत्र नवरात्र हिंदू नववर्ष की शुरुआत और शक्ति की पूजन का महापर्व भी है। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही यह नवरात्र अनुशासन और संयम का पवित्र संगम है। इस दौरान मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए केवल व्रत रखना ही काफी नहीं होता है, बल्कि कुछ कठिन नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है, तो आइए उन नियमों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
चैत्र नवरात्र में क्या करें और क्या नहीं? (Chaitra Navratri 2026 Dos And Donts)
क्या करें?
नवरात्र के दौरान सूर्योदय से पूहले उठकर स्नान करना चाहिए।
अगर आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी सात्विक भोजन करें। मन को शांत रखने के लिए ध्यान का सहारा लें।
इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप करें।
अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व शिक्षा से जुड़ी चीजों का दान करें। नवरात्र में दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
अष्टमी या नवमी के दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराएं और उपहार दें, क्योंकि कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है।
क्या न करें?
इस दौरान तामसिक भोजन जैसे कि मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें। ध्यान रखें, ‘जैसा अन्न वैसा मन’, इसलिए शुद्धता बनाए रखें।
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्र के नौ दिनों तक बाल कटवाने, दाढ़ी बनाने या नाखून काटने से बचना चाहिए।
पूजा के समय बेल्ट, जूते या पर्स जैसी चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें। ये सात्विक ऊर्जा को कम करते हैं।
देवी मां शांति की प्रतीक हैं। ऐसे में इन दिनों में किसी का अपमान करने, अपशब्द बोलने व घर में कलह करने से बचना चाहिए। इससे पूजा का फल कम हो जाता है।
अगर आपने घर में अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी खाली न छोड़ें। ज्योति का बुझना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए उसमें घी या तेल समय-समय पर भरते रहें।



