आपराधिक रिकॉर्ड वाले ग्रीन कार्ड धारकों की बढ़ीं मुश्किलें

भारत की एक सामान्य यात्रा भी अब कुछ अमेरिकी ग्रीन कार्ड धारकों के लिए अप्रत्याशित इमिग्रेशन का खतरा ला सकती है। आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे वैध स्थायी निवासियों को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तय किया है कि सीमा अधिकारी लौटने वाले ग्रीन कार्ड धारक को स्वचालित रूप से पुनः प्रवेश देने के बजाय देश में प्रवेश चाहने वाले व्यक्ति के रूप में मान सकते हैं।

ब्लांच बनाम लाउ मामले में 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन अधिकारियों को सीमा पर यह निर्णय लेने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही, सरकार को निष्कासन की कार्यवाही के दौरान बाद में आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने की छूट दी गई है।

इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि यह फैसला उन ग्रीन कार्ड धारकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े जोखिमों को काफी बढ़ा देता है, जिन पर आपराधिक आरोप लंबित हैं या जिनके आपराधिक मामले अभी सुलझे नहीं हैं।

जब्त हो सकता है ग्रीन कार्ड

न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन वकील साइरस डी. मेहता के अनुसार, यह फैसला अधिकारियों को अनुमति देता है कि वे केवल किसी आरोप या संदेह के आधार पर लौटने वाले ग्रीन कार्ड धारक को प्रवेश चाहने वाला मान लें, उनका ग्रीन कार्ड जब्त कर लें और निष्कासन की कार्यवाही पूरी होने तक व्यक्ति को पैरोल पर देश में रहने दें।

मेहता ने कहा कि यह वही टाइम ट्रैवल है जिसकी जस्टिस जैक्सन ने अपनी असहमति में कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सलाह दी कि आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे ग्रीन कार्ड धारकों को मामला लंबित रहने तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचना चाहिए।

मेहता ने आगे स्पष्ट किया कि दुकान से चोरी जैसे छोटे अपराध के आरोप वाले व्यक्ति के लिए भी यही बेहतर होगा कि जब तक मामला सुलझ न जाए, वह यात्रा न करे। क्योंकि ग्रीन कार्ड जब्त किया जा सकता है और व्यक्ति स्थायी निवासियों को मिलने वाले रोजगार और अन्य लाभों से वंचित हो सकता है।

अब व्यक्ति पर निर्दोष साबित करने का बोझ

सिएटल स्थित वकील और बुचाल्टर में पार्टनर कृपा उपाध्याय ने बताया कि यह फैसला विदेश यात्रा की योजना बना रहे ग्रीन कार्ड धारकों के लिए जोखिम के आकलन को पूरी तरह बदल देता है।

उन्होंने समझाया कि यदि किसी ग्रीन कार्ड धारक को प्रवेश चाहने वाला मान लिया जाता है और उसे हिरासत में लिया जाता है या पैरोल दी जाती है, तो सरकार अस्वीकार्यता के आधार पर निष्कासन की कार्यवाही शुरू कर सकती है। ऐसी कार्यवाही में, आरोप को गलत साबित करने का बोझ व्यक्ति के कंधों पर होता है।

यह निर्वासन कार्यवाही के ठीक विपरीत है, जहां सरकार को अपना मामला साबित करना होता है। उनके अनुसार, अब बिना दोषसिद्धि के भी केवल एक आपराधिक आरोप के सीमा पर गंभीर इमिग्रेशन परिणाम हो सकते हैं। यहां तक कि पुरानी गिरफ्तारियां, दोषसिद्धि या मामूली लगने वाले आपराधिक मामले भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान जांच का कारण बन सकते हैं।

यात्रा से पहले लें कानूनी सलाह

इमिग्रेशन वकील रेखा शर्मा-क्रॉफर्ड ने कहा कि यह फैसला उन ग्रीन कार्ड धारकों के लिए निर्दोष होने की पारंपरिक धारणा को प्रभावी ढंग से कमजोर करता है, जो आपराधिक आरोप लंबित होने पर यात्रा करते हैं। शर्मा-क्रॉफर्ड ने कहा कि CBP अब ऐसे व्यक्तियों को केवल लंबित आरोपों के आधार पर प्रवेश के लिए आवेदक के रूप में वर्गीकृत कर सकता है। यह वर्गीकरण सबूत का बोझ शिफ्ट कर सकता है, हिरासत में लिए जाने के जोखिम को बढ़ा सकता है और संवैधानिक सुरक्षा को कम कर सकता है।

इस फैसले के बाद इमिग्रेशन वकीलों का आम संदेश एकदम स्पष्ट है, जिन वैध स्थायी निवासियों पर आपराधिक आरोप लंबित हैं, जिनके आपराधिक मामले अनसुलझे हैं, या जिनका पिछला आपराधिक इतिहास समस्याग्रस्त हो सकता है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने से पहले इमिग्रेशन सलाह जरूर लेनी चाहिए। अब विदेश की एक सामान्य यात्रा भी इमिग्रेशन के लिहाज से काफी बड़े जोखिम लेकर आ सकती है।

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