जानें मोक्षदा एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व व विधि…

 आज मोक्षदा एकादशी है। मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष एकादशी को मोक्षदा एकादशी व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितरों को भी मोक्ष मिलता है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इसी दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म से विमुख अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है। एकादशी तिथि की शुरुआत तीन दिसंबर शनिवार के दिन सुबह 5:39 बजे और समापन चार दिसंबर को सुबह 5:34 बजे होगा। इस साल 5159वीं जंयती मनाई जाएगी। इस दिन गीता पढ़ना और सुनना अत्यंत ही शुभ माना जाता है।

कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत
मोक्षदा एकादशी का व्रत 3 दिसंबर को रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय 06.58 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार मोक्षदा एकादशी 03 दिसंबर यानी मनाई जा रही है।

आज एकादशी के दिन सुबह 07 बजकर 4 मिनट से रवियोग शुरू हो रहा है, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए रवि योग शुभ है। ऐसे में आज सुबह 09 बजकर 28 मिनट से 01 बजकर 27 मिनट तक विष्णु जी की पूजा कर सकते हैं।

मुहूर्त- 
एकादशी तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 03, 2022 को 05:39 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – दिसम्बर 04, 2022 को 05:34 ए एम बजे
एकादशी व्रत पारणा टाइम- 4 दिसंबर 01:04 पी एम से 03:09 पी एम

एकादशी पूजा- विधि-
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
भगवान की आरती करें। 
भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। 
इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। 
इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

मोक्षदा एकादशी के दिन फूल और तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। मोक्षदा एकादशी के पहले दिन ही तुलसी के पत्तों को तोड़कर रख लेना चाहिए।

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