उद्धव ठाकरे को चुनाव आयोग से लगा बड़ा झटका, पढ़े पूरी ख़बर

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे को शुक्रवार को चुनाव आयोग ने बड़ा झटका दिया। आयोग ने शिवसेना नाम और तीर-कमान चुनाव चिन्ह पर एकनाथ शिंदे के दावे को स्वीकार कर लिया। अब शिंदे कैंप ही असली शिवसेना के नाम से जाना जाएगा। वहीं, उद्धव कैंप को वह नाम और चुनाव चिन्ह बरकरार रखने की इजाजत दी जो उन्हें अक्टूबर 2022 में संपन्न हुए विधानसभा उपचुनाव से पहले सौंपा गया था। उद्धव खेमे की पार्टी का नाम ‘शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ और “ज्वलंत मशाल” चुनाव चिन्ह के रूप में मिला था।

चुनाव आयोग ने 78 पन्नों के आदेश में इसके बारे में विस्तार से बताया है। तीन सदस्यीय आयोग ने इसमें कई टिप्पणियां कीं और “पार्टी संविधान का परीक्षण” और बहुमत का परीक्षण” जैसे कई मुद्दों के बारे में विस्तार से बताया। “पार्टी संविधान के परीक्षण” पर टिप्पणी करते हुए आयोग ने कहा कि शिवसेना के संविधान में 2018 का संशोधन एक व्यक्ति पर विभिन्न संगठनात्मक नियुक्तियां करने की व्यापक शक्तियां प्रदान करता है। यह अलोकतांत्रिक था।

शिंदे गुट को क्यों मिला शिवसेना का नाम और सिंबल?
आयोग ने कहा, “संक्षेप में कहें तो पार्टी के संविधान में अध्यक्ष द्वारा निर्वाचक मंडल को नामिनेट करने की परिकल्पना की गई है। यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।” चुनाव आयोग ने “बहुमत के परीक्षण” से संबंधित विभिन्न तथ्यों का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों को 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 विजयी उम्मीदवारों के पक्ष में लगभग 76% वोट मिले थे। आयोग ने कहा कि शिवसेना के उद्धव के नेतृत्व वाले गुट को सिर्फ 23.5% वोट मिले थे।

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