अमेरिका के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई…

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थवेवस्था अमेरिका के सामने इन दिनों अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हो गया है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इतिहास में पहली बार डिफॉल्ट  होने की कगार पर है। लेकिन अब डेल सीलिंग बिल को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे इसे रोका जा सकता है। 

संसद से मिली बिल को मंजूरी

अमेरिका के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। तेजी से कर्ज डिफॉल्ट

के ओर बढ़ रहे अमेरिका में डेट सीलिंग बिल को मंजूरी मिल गई है। US कांग्रेस  यानी संसद ने बिल को मंजूरी दे दी है। अब सबकी नजरें US सीनेट पर टिकी हुई हैं। क्योंकि बिल को सीनेट से मंजूरी मिलना बाकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सीनेट से अपील की है कि डील पर जल्द से जल्द वोट करें। इससे पहले कर्ज संकट को लेकर बाइडेन प्रशासन और मैक्कार्थी के बीच डेट लिमिट बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

डेट सीलिंग के पक्ष में पड़े 314 वोट

आर्थिक मंदी के खतरे से चारों ओर से घीरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए डेट सीलिंग डील (debt ceiling deal) एक अहम ट्रिगर है। हालांकि कांग्रेस की मंजूरी से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। US कांग्रेस में डेट सीलिंग बिल (debt ceiling bill) के पक्ष में 314 वोट डाले गए हैं, जबकि इसके विरोध में 117 वोट डाले गए हैं।

बता दें कि इस बिल को डेट डिफॉल्ट को टालने के लिए पास किया गया है। US कांग्रेस से पास होने के बाद डेट सीलिंग बिल को सीनेट में भेजा जाएगा। 

US कांग्रेस में डेट सीलिंग बिल पास होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि डेट डिफॉल्ट को रोकने के लिए एक अहम फैसला किया गया है। उन्होंने US सीनेट  से अपील की है कि इस डील पर जल्द से जल्द वोट करें।

बता दें कि US कांग्रेस के बाद सीनेट में भी बिल को मंजूरी मिलने के बाद अगले 2 साल के लिए US की कर्ज सीमा को बढ़ा दिया जाएगा। जिसके बाद अमेरिका पर छाया संकट दूर हो जाएगा।

क्या है डेट सीलिंग संकट?

अमेरिका में सरकार अपने खर्च को चलाने के लिए कर्ज लेती है। ये रकम US कांग्रेस यानी संसद द्वारा तय किया जाता है। दुनिया के कई देशों का बजट घाटे में चलता है। यानी टैक्स से जितनी आय होती है उससे ज्यादा खर्च होते हैं।

वहीं, इस बिल का भुगतान करने के लिए सरकार कर्ज लेती है। अमेरिका में यह एक नॉर्मल प्रोसेस है। हालांकि, इकोनॉमी के लिहाज से कर्ज की सीमा तय होती है। बता दें कि अमेरिका में 1960 से अब तक कर्ज की सीमा में 78 बार बदलाव किए जा चुके हैं।

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