अफ्रीकी देशों ने ओमिक्रोन की चुनौती से निपटने के लिए जाचं के साथ इसे रोकने के लिए भी किये उपाय,टीकाकरण बन रहा चुनौती

अफ्रीकी देशों ने ओमिक्रोन की चुनौती से निपटने के लिए जांच बढ़ाने के साथ नियंत्रण के उपाय करने शुरू कर दिए हैं। इस बीच दक्षिणी अफ्रीका के देशों में कोरोना के साप्ताहिक मामलों में 54 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुरुवार को जारी एक बयान में दी।ओमिक्रान वैरिएंट के मामले चार अफ्रीकी देशों, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, घाना और नाइजीरिया में पाए गए हैं। यह वैरिएंट अब तक करीब 30 देशों में पहुंच गया है।

दुनिया भर में जानकारी में आए ओमिक्रोन के लगभग 62 प्रतिशत मामले अकेले बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका में हैं। यह जानकारी कांगो की राजधानी ब्रेजाविले स्थित डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय कार्यालय ने दी।डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ओमिक्रोन वैरिएंट का कई और देशों में पता चलने की आशंका है। बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रोन की जल्द पहचान होने से विश्व को हालात से निपटने का पर्याप्त समय मिल गया है। हमारे पास अवसरों की खिड़की है। हमें इस वैरिएंट से निपटने के लिए तेजी के साथ रोकथाम के उपाय करने चाहिए। डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक मतशीदिसो मोएती ने अफ्रीकी देशों से कोरोना के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए उपाय तेज करने का आग्रह किया है

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ओमिक्रोन के स्पाइक प्रोटीन में म्युटेशन (32) की संख्या अधिक होती है। प्रारंभिक साक्ष्यों से पता चला है कि म्युटेशन अधिक होने के कारण चिंता वाले अन्य वैरिएंट की तुलना में लोगों के दोबारा संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है। अफ्रीका में टीकाकरण की स्थिति ठीक नहीं है। यहां अभी तक 7.5 प्रतिशत आबादी को ही पूरी तरह से टीका लगाया जाता है। 80 प्रतिशत से अधिक आबादी को अभी भी पहली डोज नहीं मिल पाई है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि अभी तक केवल पांच अफ्रीकी देश डब्ल्यूएचओ के वैश्रि्वक लक्ष्य तक पहुंच पाए हैं।

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