बड़ों से 9 गुना ज्यादा तंबाकू के जाल में फंस रहे हैं बच्चे

तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों के सभी स्तरों पर प्रचार के बावजूद इनकी खपत दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। डाक्टर और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ समय-समय इसके प्रति चेताते भी रहते हैं। 

ऐसे में विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर रविवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने की एक चेतावनी कुछ ज्यादा ही चिंताजनक है। उनके मुताबिक, इस समय बच्चे नए तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के प्रति वयस्कों की तुलना में नौ गुना अधिक दुष्प्रेरित होते हैं, जिससे वे उद्योग की मार्केटिंग रणनीतियों के प्राथमिक लक्ष्य बन गए हैं।

किशोरों को लुभा रहे आकर्षक डिजाइन

निकोटीन उद्योग तेजी से फ्लेवर, आकर्षक डिजाइन, डिजिटल प्रचार और अन्य तकनीकों का उपयोग कर रहा है ताकि अपने उत्पादों को युवाओं और किशोरों के लिए आकर्षक बनाया जा सके, जिससे निकोटीन की लत लगने की चिंता बढ़ गई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर )- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआइसीपीआर) की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने तंबाकू मुक्त भारत द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बताया कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग अक्सर अपने मार्केटिंग प्रयासों को बच्चों और युवा वयस्कों पर केंद्रित करते हैं, क्योंकि अधिकांश उपयोगकर्ता ऐसे उत्पादों का सेवन किशोरावस्था या प्रारंभिक वयस्कता में शुरू करते हैं।

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और मार्केटिंग तकनीकें जिज्ञासा, प्रयोग और अंततः लत पैदा करने के लिए डिजाइन की गई हैं। इसलिए आज की चुनौती पारंपरिक तंबाकू उत्पादों से परे बढ़ गई है और इसमें नए निकोटीन उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें अक्सर कम हानिकारक और जोखिम भरा माना जाता है।

कम उम्र से शुरू होती लत

दिल्ली के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के पूर्व प्रमुख डॉ. आलोक ठाकुर ने कहा कि हम आन्कोलाजिस्ट के रूप में हर दिन तंबाकू के उपयोग के परिणामों को देखते हैं। तंबाकू से संबंधित कई कैंसर रोके जा सकते हैं, फिर भी हजारों परिवारों को पीड़ित होना पड़ता है, क्योंकि लत अक्सर कम उम्र में शुरू होती है।

भारत में मुंह के कैंसर के मामलों का एक महत्वपूर्ण अनुपात गुटखा, खैनी और इसी तरह के बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों से जुड़ा हुआ है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वर्तमान में दुनियाभर में 13-15 वर्ष की उम्र वर्ग के कम से कम चार करोड़ बच्चे कम से कम एक तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, इसी उम्र वर्ग के डेढ़ करोड़ से अधिक किशोर पहले से ही ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं।

व्यस्कों से ज्यादा बच्चों में नशे की लत

जिन देशों में डेटा उपलब्ध है, वहां बच्चे औसतन वयस्कों की तुलना में नौ गुना अधिक वेपिंग करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत ने 2019 में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाकर एक बड़ा कदम उठाया, लेकिन इसकी अवैध पहुंच, ऑनलाइन बिक्री चैनलों और इंटरनेट मीडिया कंटेंट के संबंध में चिंताएं बनी हुई हैं, जो युवाओं को निकोटीन उत्पादों और संबंधित प्रचार संदेशों के संपर्क में लाती हैं। 

आकर्षण को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है। युवा अक्सर उत्पाद के केवल आकर्षक पक्ष को देखते हैं और उसके बाद की लत और स्वास्थ्य परिणामों को नहीं देखते। सार्वजनिक स्वास्थ्य के अनुमानों के अनुसार, तंबाकू का उपयोग भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख मौतों का कारण बनता है। अध्ययनों ने तंबाकू के उपयोग से संबंधित वार्षिक आर्थिक बोझ का अनुमान 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाया है, जो स्वास्थ्य देखभाल लागत और उत्पादकता नुकसान को दर्शाता है।

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