घने कोहरे के कारण सौ से ज्यादा फ्लाइट्स में देरी व दो फ्लाइट्स हुई डायवर्ट…

मंगलवार को दिल्ली में घने कोहरे के कारण इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर सौ से ज्यादा फ्लाइट्स में देरी हुई है। इस दौरान दृश्यता कम होने के कारण दिल्ली आने वाली दो फ्लाइट्स को जयपुर डायवर्ट कर दिया गया है। मंगलवार सुबह दिल्ली में घने कोहरे के कारण दृश्यता 200 मीटर से कम हो गई थी जिस कारण हवाई यातायात प्रभावित हुआ है। 

एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, स्पाइसजेट की रात 11:45 मिनट पर और इंडिगो 2:15 मिनट पर जयपुर एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट कर दी गईं। अधिकारियों ने बताया कि, दिल्ली एयरपोर्ट पर ये इस सीजन का पहला फ्लाइट डायवर्जन था।

एयरपोर्ट के एक अधिकारी के अनुसार, दोनों ही मामलों में पायलट CAT-III B के अनुरूप नहीं थे, जिस कारण उन्हें एयरपोर्ट पर लैंड करने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी 50 मीटर तक थी, इसलिए एटीसी ने दोनों फ्लाइट्स नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर के लिए निर्देशित किया।

ठंड में दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स की आसान लैंडिंग कराने के लिए लो विजिबिलिटी प्रोसीजर (LVP) शुरू किया गया है। इस दौरान CAT-I प्रोसीजर चालू है। ये पायलट को लैंडिगं के दौरान गाइड करने का सामान्य तरीका है। इस प्रोसीजर को तब लागू किया जाता है जब विजिबिलिटी 8 सौ मीटर तक होती है। CAT-II प्रोसीजर तब लागू किया जाता है जब विजिबिलिटी 550 तक आ जाती है। इसी तरह जब विजिबिलिटी 175 से 300 के बीच होती है तो CAT- III B लागू हो जाता है। ऐसे पायलट जो CAT-III B के लिए योग्य होते हैं उन्हें 50 मीटर विजिबिलिटी में भी लैंडिंग की इजाजत दी जाती है। जिन दो फ्लाइट्स को जयपुर के लिए डायवर्ट किया गया वो दोनों ही पायलट CAT-III B की योग्यता वाले नहीं थे।

अधिकारी ने बताया कि, अगर विजिबिलिटी 50 मीटर तक हो इस स्थिति में भी फ्लाइट्स को लैंड करने की अनुमति दी जाती है लेकिन किसी फ्लाइट को उड़ान भरने की अनुमति तभी दी जाती है जब रनवे विजिबिलिटी रेंज (RVR) 125 मीटर तक हो। इस कारण कुछ फ्लाइट्स के आने जाने में देरी हो जाती है।

मौसम विभाग के अधिकारी ने बताया कि, रात 3:30 बजे से लेकर सुबह 7:30 तक विजिबिलिटी सबसे खराब थी। इस दौरान विजिबिलिटी 50 मीटर के आस पास रही। और साढे़ सात बजे तक बढ़ कर 100 मीटर तक पहुंच गई। इन चार घंटों के दौरान पालम और सफदरजंग दोनों जगहों पर विजिबिलिटी 50 मीटर को करीब थी और CAT-III B प्रोसीजर लागू था। दोनों पायलट के CAT-III B स्थिति के लिए कुशल ना होने के कारण दो फ्लाइट्स को जयपुर एयरपोर्ट डायवर्ट कर दिया गया।

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