उत्तराखंड में बढ़ते यातायात के दबाव और हादसों की बढ़ती संख्या के बीच अब सरकार ने सड़क सुरक्षा नीति को नया रूप देना किया शुरू

उत्तराखंड में बढ़ते यातायात के दबाव और हादसों की बढ़ती संख्या के बीच अब सरकार ने सड़क सुरक्षा नीति को नया रूप देना शुरू कर दिया। वर्ष 2016 में आननफानन में बनी नीति में अब सड़क सुरक्षा के लिए ठोस उपाय और सरकार के विजन को शामिल किया जाएगा। मसूरी में 22 से 24 नवंबर 2022 में आयेाजित मंथन शिविर के सुझावों को भी नीति में शामिल किया जा रहा है। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इस शासन को भेजा जाएगा। 

यह भी होगा बदलाव: पुरानी नीति में सुरक्षित सड़कें देने का उल्लेख तो है, लेकिन किस प्रकार बनाएंगे यह पहलू स्पष्ट नहीं है। नई नीति में शून्य दुर्घटना विजन के तहत सड़कों के किए जाने वाले प्रयासों को शामिल किया जाएगा। इसमें क्रश बरियर, हादसों के बाद राहत एवं बचाव की व्यवस्था, ड्राइविंग लाइसें और वाहन फिटनेस के लिए आधुनिक तकनीकि के उपयोग को नीति में  लाया जाएगा।

हादसों पर अंकुश लगाना चुनौती: उत्तराखंड सड़क हादसों के लिहाज से हिमालयी राज्यों में टॉप-03 राज्यों में शामिल है। पिछले पांच साल में उत्तरखंड में 6870 हादसे हो चुके हैं। इनमें 3449 लोगों की जान गई है। 

मंथन शिविर के सुझाव
जीरो एक्सीडेंट विजन स्थापित करना, सभी मजिस्ट्रियल जांच रिपेार्ट को सिफारिशों के साथ पोर्टल पर अपलोड करना, संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा के इंतजाम करना।

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