पार्किंसंस के मरीजों के लिए नई उम्मीद

पार्किंसंस रोग का नाम सुनते ही हमारे जेहन में मस्तिष्क और कांपते हाथों की तस्वीर उभरती है, लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि इस दिमागी बीमारी की जड़ें आपके दिमाग में नहीं, बल्कि आपकी आंतों में छिपी हैं? लंदन विश्वविद्यालय कॉलेज के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठाया है, जिसने चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है।

क्या आप जानते हैं कि मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला पार्किंसंस जैसा गंभीर रोग आपकी आंतों से शुरू हो सकता है? लंदन विश्वविद्यालय कॉलेज के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक ऐसी खोज की है, जिसने चिकित्सा जगत में नई उम्मीद जगा दी है। इस नए अध्ययन में यह पता चला है कि कैसे हमारी आंतों में मौजूद कुछ खास कोशिकाएं इस बीमारी को दिमाग तक पहुंचाने में मदद करती हैं।

क्या है यह नई खोज?
‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन ने उस रहस्य से पर्दा उठाया है जो अब तक वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ था। शोधकर्ताओं ने पाया कि पार्किंसंस रोग के मस्तिष्क तक फैलने के पीछे “आंतों के मैक्रोफेज” की बहुत बड़ी भूमिका होती है।

मैक्रोफेज वास्तव में हमारे शरीर की इम्यून कोशिकाएं होती हैं, जिनका मुख्य काम रोगाणुओं को मारना होता है। लेकिन इस रिसर्च में देखा गया कि ये कोशिकाएं पार्किंसंस से जुड़े विषाक्त प्रोटीनों को आंतों से हटाकर मस्तिष्क तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं।

चूहों पर किया गया सफल प्रयोग
इस प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जब इन “आंतों के मैक्रोफेज” की संख्या को कम किया गया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए:

विषाक्त प्रोटीनों का मस्तिष्क की ओर फैलाव कम हो गया।
पार्किंसंस रोग से ग्रसित चूहों की शारीरिक गतिविधियों और लक्षणों में काफी सुधार देखा गया।
यह साबित करता है कि अगर इन कोशिकाओं को नियंत्रित कर लिया जाए, तो बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

भविष्य के लिए एक बड़ी उम्मीद
पार्किंसंस एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें मरीज को हाथ-पैर कांपने और चलने-फिरने में भारी परेशानी होती है। शोधकर्ता टिम बार्टेल्स के अनुसार, इस तरह की बीमारियों की गति काफी धीमी होती है और इन्हें पूरी तरह विकसित होने में दशकों लग जाते हैं।

टिम बार्टेल्स का कहना है:
“यह समझना कि पार्किंसंस शरीर में कैसे शुरू होता है, हमें इसके लिए सरल ब्लड टेस्ट विकसित करने की अनुमति दे सकता है। इससे हम मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने से पहले ही बीमारी की पहचान कर सकेंगे।”

यह शोध लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है। यदि हम बीमारी के मस्तिष्क तक पहुंचने से पहले ही उसका पता लगा लें और उसका प्रबंधन शुरू कर दें, तो मरीजों को पार्किंसंस के गंभीर दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है। यह खोज चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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