ईंधन संकट से अंधेरे में डूबा क्यूबा, सड़कों पर उतरे सैकड़ों प्रदर्शनकारी

 क्यूबा देश पर इन दिनों ऊर्जा संकट के बादल मंडरा रहे है। वहां के ऊर्जा मंत्री विसेंटे डे ला ओ लेवी ने इस बात की पुष्टि की है कि देश में ईंधन पूरी तरह खत्म हो चुका है।

हालात इतने खराब है कि देश में डीजल और ईंधन की कमी के कारण 22 घंटे तक बिजली की कटौती की जा रही है। यह स्थिति अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बनी है। वहां के लोगों को फिलहाल ब्लैकआउट का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, इस हालात में देश की राजधानी हवाना शहर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं। कई प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और बिगड़ते ऊर्जा संकट से हताश होकर बत्तियां जलाओ के नारे लगा रहें हैं। इस दौरान लोगों ने बर्तन पीटने सहित कूड़े के ढेर में आग लगा दिया।

सौर ऊर्जा से चल रहा काम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा मंत्री ने बताया, ” कच्चा तेल और ईंधन तेल दोनों में से हमारे पास बिल्कुल कुछ भी नहीं बचा है; इस वक्त हमारे पास एकमात्र चीज है। वह है कुओं से निकलने वाली गैस, जिसका उत्पादन बढ़ा दिया गया है।” लेवी ने देश की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया।

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा और खान मंत्री ने बताया कि देश ने भले ही पिछले दो सालों में 1,300 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने का काम किया है, फिर भी ईंधन की लगातार कमी के कारण बिजली ग्रिड अस्थिर हो रहा है और उसकी कार्यक्षमता घट रही है। इसमें एक बड़ी समस्या बड़े बैटरी भंडारण प्रणालियों की कमी है।

क्यूबा ने मदद की लगाई गुहार

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हवाना पर दबाव और बढ़ा दिया है। उन्होंने वेनेज़ुएला से होने वाली तेल की खेपों को रोकने और वैश्विक शुल्क लगाने की धमकी देने के बाद, यह कसम खाई है कि क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं मिलेगा।

इस द्वीप के भविष्य को लेकर चल रही वार्ताओं के बीच, ट्रंप ने कहा, “उन्हें क्यूबा को अपने अधिकार में लेने की उम्मीद है।” यह बयान उन्होंने जनवरी में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के प्रयास के बाद दिया था।

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