नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 15 जून से शुरू होंगी उड़ान सेवाएं

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि नोएडा के जेवर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान सेवाएं आगामी 15 जून से शुरू हो जाएंगी। आदित्यनाथ ने कहा कि हवाई अड्डे की यह परियोजना उस क्षेत्र के बदलाव को दर्शाती है, जो कभी अपराध के लिए जाना जाता था। ‘उत्तर प्रदेश के बदलाव के नौ वर्ष’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर क्षेत्र, जो कभी अपराध के लिए बदनाम था, अब एक वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा, ” भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा जेवर में बन चुका है और 15 जून से हम वहां से उड़ान सेवाएं शुरू करने जा रहे हैं।

इंडिगो और अकासा एयर देंगी सेवाएं 
विमानन कंपनी इंडिगो और अकासा एयर ने हाल ही में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में अपनी सरकार के सत्ता में आने से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति को बहुत खराब बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य ”बीमारू” बन गया था और सूबे में दंगे, अराजकता, व्यापारियों का पलायन, किसानों की आत्महत्या और पारंपरिक उद्योगों का पतन आम बात थी।

सरकार बनने पर विकास पर दिया ध्यान 
उन्होंने कहा, ” सरकार की कार्यप्रणाली में न कोई पारदर्शिता थी, न कोई नीति और न ही कोई इरादा। माफिया सरकार के समानांतर अपना राज चलाते थे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद प्रशासन ने विस्तृत योजना एवं शासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। आदित्यनाथ ने बताया कि पदभार संभालने के बाद लगभग एक महीने तक वह हर शाम मंत्रियों के साथ बैठकें करते थे, ताकि विभागीय प्रस्तुतियों की समीक्षा कर सकें एवं कार्ययोजनाएं तैयार कर सकें।

बिना किसी भेदभाव के सरकार कर रही है काम 
उन्होंने कहा, ” उस समय हमारे पास पैसे नहीं थे। यहां तक कि बैंक भी हमें कर्ज देने को तैयार नहीं थे और राजकोष लगभग खाली था।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय राज्य का वार्षिक बजट लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये था जबकि आबादी करीब 20 करोड़ थी। आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के, नीति-आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा देने का फैसला किया। 

एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में 
उन्होंने कहा, ” हमने तय किया है कि हम उत्तर प्रदेश में भाई-भतीजावाद, वंशवादी राजनीति या क्षेत्रवाद को पनपने नहीं देंगे।” बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। यह सड़क, मेट्रो तथा रेलवे अवसंरचना के मामले में एक अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें राज्य में हो रहे तेज बदलाव की मिसाल करार दिया।

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