एकादशी ही नहीं रविवार और द्वादशी को भी नहीं तोड़े जाते तुलसी के पत्ते

सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है। लगभग हर घर में तुलसी जरूर लगी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसी वजह से उन्हें ‘हरिप्रिया’, ‘वृंदा’ और ‘विष्णु-प्रिया’ जैसे सुंदर नामों से भी जाना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि तुलसी माता देवी लक्ष्मी की सहायक हैं और घर के वातावरण को शुद्ध करती हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में इस पौधे से पत्ते तोड़ने के भी कुछ खास नियम बनाए गए हैं? कहा जाता है कि एकादशी के साथ-साथ द्वादशी को भी तुलसी तोड़ना मना होता है।
शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कुछ विशेष दिनों में तुलसी के पत्ते भूलकर भी नहीं तोड़ने चाहिए। रविवार, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण, इन दिनों पर तुलसी के पत्ते तोड़ना साफ मना होता है। अगर आप इन तिथियों पर तुलसी के पत्ते तोड़ते हैं, तो इसे शास्त्रों में एक बड़ा दोष माना गया है। इसके अलावा, सूर्यास्त हो जाने के बाद यानी शाम या रात के समय भी तुलसी के पत्ते तोड़ने की सख्त मनाही है।
तुलसी तोड़ने के तरीके
पत्ते तोड़ने के तरीके को लेकर भी कुछ नियम हैं। कभी भी तुलसी के पत्तों को अपने नाखूनों से खरोंचकर नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उंगलियों के पोरों का कोमलता से इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही, बिना स्नान किए अशुद्ध अवस्था में तुलसी के पौधे को छूना भी पाप माना जाता है। वहीं, रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
इन दिनों पर क्यों है पत्ते तोड़ने की मनाही?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन खास दिनों में तुलसी के पत्ते क्यों नहीं तोड़ने चाहिए? धर्म शास्त्रों के अनुसार, रविवार, एकादशी, द्वादी अमावस्या और पूर्णिमा के दिन तुलसी के पौधे में एक विशेष प्रकार की पवित्र ऊर्जा बहुत ज्यादा सक्रिय होती है। जब हम इन दिनों में पत्ते तोड़ते हैं, तो वह ऊर्जा बाधित होती है, जिससे घर में नकारात्मकता आ सकती है।
वहीं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय ब्रह्मांड में राहु और केतु की नकारात्मक ऊर्जा फैली होती है। इसलिए, ग्रहण के समय तोड़े गए पत्ते अशुद्ध माने जाते हैं और भगवान की पूजा में भी इन्हें स्वीकार नहीं किया जाता। अगर कोई व्यक्ति गलत समय पर या वर्जित दिनों में तुलसी के पत्ते तोड़ता है, तो उसे कई तरह के दोष लग सकते हैं। ऐसा करने से घर में बेवजह क्लेश होता है, मानसिक और आध्यात्मिक शांति भंग होती है और आर्थिक परेशानियां भी घेरने लगती हैं।


