बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की गोदरेज कंपनी की याचिका…

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोदरेज ऐंड बॉयस कंपनी लिमिटेड की याचिका को खारिज करके बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का रास्ता साफ खर दियाहै। कंपनी ने कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए किए जाने वाले भूमि अधिगृहण को गैरकानूनी बताया था। मुंबई के विखरोली इलाके में कंपनी की जमीन का भूमि अधिगृहण प्रोजेक्ट के लिए किया जाना था और इसके लिए सरकार ने 264 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया था। 

हाई कोर्ट ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और लोगों के हित से  जुड़ा हुआ है। इसके लिए भूमि अधिगृहण की प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई है। जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस एमएम साथाए की डिविजन बेंच ने कहा, याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई केस सामने नहीं रखा है जिसपर अलग से विचार किया जाए। यह प्रोजेक्ट लोगों के हित में है और यह किसी निजी हित के लिए नहीं है। यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट होगा। इसलिए याचिका खारिज की जाती है। 

कंपनी ने दावा किया था कि पहले उसे 572 करोड़ का मुआवजा देने का वादा किया गया था लेकिन बाद में यह 264 करोड़ हो गया जो कि बहुत ही कम है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार ने कंपनी की बात को खारिज किया था और कहा था कि देरी की वजह से लागत बढ़ गई है। बेंच ने कहा, रोक लगाने का कोई सवाल नहीं है। कंपनी ने 15 सितंबर 2022 को 264 करोड़ के ऑफर के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। विखरोली में कंपनी की 39252 वर्ग मीटर यानी लगभग 10 एकड़ जमीन का आधिगृहण किया जाना है। इस याचिका में भूम अधिगृहण कानून 2013 के संशोधन को भी चुनौती दी गई थी। 

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