पाकिस्तान में अब एक नए किस्म के वायरस एमपॉक्स (Mpox) ने दस्तक दी…

पड़ोसी देश पाकिस्तान में अब एक नए किस्म के वायरस एमपॉक्स (Mpox) ने दस्तक दी है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान ने एमपॉक्स के पहले मामले की पुष्टि की है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मंगलवार को सऊदी अरब से पाकिस्तान पहुंचे एक यात्री में एमपॉक्स संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिसे राजधानी के एक अलग अस्पताल में रखा गया है,और उसके संपर्क में आए सभी लोगों का परीक्षण किया जा रहा है।

पाकिस्तान के मशहूर अखबार ‘डॉन’ की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि फिलहाल पाकिस्तान में इस वायरल बीमारी के स्थानीय स्तर संक्रमण होने का कोई सबूत नहीं मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार को सऊदी अरब से आए एक मरीज में वायरस का पॉजिटिव परीक्षण पाया गया। इससे बाद हवाई अड्डों पर आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया गया है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित मरीज मंडी बहाउद्दीन का रहने वाला है और जेद्दा में ड्राइवर के तौर पर काम करता था।

क्या है Mpox:

Mpox एक वायरस जनित संक्रमित बीमारी है, जिसमें फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। इस बीमारी से संक्रमित मरीज के शरीर पर मवाद से भरे कई घाव बनते हैं। यह बीमारी पीड़ित के निकट संपर्क में आने से बहुत तेजी से फैलता है।  जुलाई 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने  इस बीमारी को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। बाद में उसी साल नवंबर में WHO दोबारा अलर्ट जारी किया था।

पिछले साल 28 नवंबर को WHO ने नाम से जुड़े विवाद और नस्लवाद की चिंताओं का हवाला देते हुए पुराने शब्द मंकीपॉक्स को बदलकर इस बीमारी का नाम एमपॉक्स कर दिया था।

इस बीमारी के लक्षण क्या:
इस बीमारी से संक्रमित मरीजों के शरीर पर आमतौर पर दाने-दाने और फोड़े बनते हैं। मरीज को तेज बुखार आता है। गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, कमजोरी और गले में सूजन जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस संक्रमण के लक्षण आमतौर पर किसी पीड़ित के संपर्क में आने से एक सप्ताह के भीतर शुरू हो जाते हैं लेकिन उसे सामान्यत: दिखने में एक से 21 दिन का वक्त लग सकता है।

WHO के मुताबिक एमपॉक्स एक वायरल जूनोटिक बीमारी है जो चेचक के वायरस के कारण होती है और संक्रामक होती है। यह संक्रमित जानवरों से मनुष्यों में या संक्रमित मनुष्यों से अन्य मनुष्यों में निकट संपर्क में आने पर ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है। बता दें कि कोरोनावायरस संक्रमण भी इसी तरह ड्रॉपलेट्स से फैला था।

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